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आगरा: श्रीपारस अस्पताल संचालक के विरुद्ध कोर्ट में मुकदमे के लिए प्रार्थनापत्र, मृत मरीज की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

Thu, 30 Sep 2021 10:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

श्रीपारस अस्पताल में 14 मई को फिरोजाबाद के शिकोहाबाद निवासी मरीज की मौत हो गई थी। उसकी पत्नी का आरोप है कि डॉक्टर ने पति को कोरोना संक्रमित बता 3.98 लाख रुपये वसूले। पति का शव नहीं दिया। पांच लाख रुपये और मांगे, रकम नहीं देने पर उसके गहने उतरवा लिए गए। 
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श्रीपारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में कोरोना की दूसरी लहर में दमघोंटू मॉकड्रिल से चर्चाओं में आए श्रीपारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिंजय जैन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने के लिए अदालत में प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया है। अस्पताल में इलाज के दौरान मृत मरीज की पत्नी का आरोप है कि चार दिन में इलाज के नाम पर उससे 3.98 लाख रुपये वसूल लिए। पति का शव नहीं दिया गया। पांच लाख रुपये और मांगे, रकम नहीं देने पर उसके गहने उतरवा लिए गए। इस मामले में अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी। 

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मूल रूप से फिरोजाबाद के शिकोहाबाद निवासी 29 वर्षीय नम्रता यादव पति सुनील कुमार के साथ जयपुर में रहती थी। 11 मई को रात करीब 1.30 बजे पति सुनील कुमार को भगवान टॉकीज स्थित श्री पारस अस्पताल में भर्ती कराया। पति को बुखार था। शुगर बढ़ी हुई थी। भर्ती के समय पति को डॉ. अरिंजय ने पहले कोरोना पॉजिटिव बताया। फिर दोबारा जांच में निगेटिव बताया। 

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ये आरोप लगाए 
आरोप है कि उनसे इलाज के नाम पर 1.98 लाख रुपये जमा कराए। दो लाख रुपये की दवाएं मंगाईं। 14 मई को पति की मृत्यु हो गई। शव देने से पहले पांच लाख रुपये और मांगे। पीड़ित ने आर्थिक स्थिति का हवाला दिया। आरोप है कि स्टाफ ने हाथों से पुश्तैनी सोने की चूड़ियां व गले से जंजीर उतरवा कर ले ली। विरोध करने पर धमकाया। 

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इस मामले में पीड़ित ने न्यू आगरा थाना में प्रार्थनापत्र दिया। मुकदमा नहीं होने पर अधिवक्ता के माध्यम से पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थनापत्र दाखिल किया है। अधिवक्ता आशुतोष श्रोतिया ने बताया कि अगली सुनवाई एक अक्तूबर को कोर्ट में सुनवाई होगी। 

मॉकड्रिल की जांच तीन महीने बाद भी अधूरी
श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिंजय जैन का सात जून को वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें वह ऑक्सीजन की मॉकड्रिल के बारे में बता रहे थे। इस मामले में प्रशासनिक जांच के बाद संचालक के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एसीएमओ ने महामारी फैलाने का मुकदमा दर्ज कराया था। अस्पताल सील है। परंतु तीन महीने बाद भी पुलिस और आईएमए की जांच अधूरी है। पीड़ितों को न्याय का इंतजार है।
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