वैलेंटाइन के मायने सबके लिए अलग-अलग होते हैं। कोई अपनों में प्यार तलाशते हैं, तो कई अलग-अलग वस्तु और प्रकृति में। ताजनगरी में कई ऐसे लोग हैं, जिनके अलग-अलग वैलेंटाइन हैं। किसी ने पेड़, तो किसी ने किताबों को अपना वैलेंटाइन माना है। जबकि कुछ तो ऐसे हैं, जो पशु और निर्धन बच्चों में प्यार ढूंढते हैं। श्रुति, लव, दीक्षा और मयंक ऐसे ही शख्स हैं, जो अपने इस शौक से लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
'मुझे पशुओं से बहुत प्यार है'
कमला नगर निवासी श्रुति ने बताया कि मुझे पशुओं से बहुत प्यार है। खासकर श्वान से। जब भी घर से बाहर निकलती हूं, उन्हें कुछ न कुछ जरूर खिलाती हूं। परिजनों ने भी मुझे यही संस्कार दिए हैं। जल्द मैं अपने घर में एक छोटा श्वान भी लाने वाली हूं। यही मेरा वैलेंटाइन होगा।
'निर्धन बच्चों को पढ़ाना पसंद'
सिकंदरा के लव उपाध्याय ने कहा कि मुझे निर्धन बच्चों को पढ़ाना बहुत पसंद है। उनसे मेरा अटूट रिश्ता हो गया है। जब भी मौका मिलता है, उन्हें पढ़ाने की कोशिश करता हूं। इसके लिए मैं उनसे किसी प्रकार का शुल्क नहीं लेता हूं। सही मायनों में वे ही मेरे लिए वैलेंटाइन हैं।