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यूपी: प्रदेश में किसानों की पहली निजी मंडी आगरा में खुलेगी, शासन ने जारी की अधिसूचना

Sun, 05 Sep 2021 09:39 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

दिव्य भूमि एग्रीक्रोप प्रोड्यूसर कंपनी ने आगरा-ग्वालियर मार्ग किनारे 4610 वर्ग मीटर के फार्म हाउस में किसानों की निजी मंडी को बनाया है। जानकारों का कहना है कि इस मंडी के खुलने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका किसानों को फायदा होगा। किसान देश-दुनिया में अपना कारोबार कर सकेंगे। 
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निजी मंडी के बाहर खड़े किसान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में किसानों की पहली निजी मंडी आगरा में खुलेगी। जहां से किसान देश-दुनिया में कारोबार कर सकेंगे। 600 किसानों के समूह द्वारा विकसित एक कृषि फार्म में उप मंडी स्थल को शासन से मंजूरी मिल गई है। इस मंडी को किसानों का समूह (एफपीओ) चलाएगा। पिछले वर्ष इस मंडी का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग को भेजा गया था।

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आगरा-ग्वालियर मार्ग पर छीतापुरा नगला वीरई गांव में दिव्य भूमि एग्रीक्रोप प्रोड्यूसर कंपनी ने 4610 वर्ग मीटर के फार्म हाउस में इस निजी मंडी को बनाया है। कृषक समूह में 600 सदस्य हैं। यह प्रदेश का पहला एफपीओ है, जिसे शासन से मंजूरी मिली है। 

प्रदेश की कृषि उत्पादन मंडी नियमावली में व्यवस्था है कि कोई भी व्यक्ति, कृषक उत्पादक संगठन आदि तय प्रक्रिया का पालन कर मंडी उपस्थल स्थापित कर क्षेत्रीय किसानों केउत्पाद की खरीद-बिक्री कर सकते हैं। लेकिन, निजी मंडी स्थपित करने के लिए पांच लाख रुपये प्रतिभूति देनी पड़ती थी। इस वजह से किसान इस व्यवस्था का लाभ नहीं उठा पाते थे। 

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पट्टे पर ली है जमीन 
पिछले वर्ष अपर मुख्य सचिव कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार डॉ. देवेश चतुर्वेदी के समक्ष यह मुद्दा उठा था। उन्होंने नियमावली में बदलाव कर प्रतिभूति के प्रावधान को हटवा दिया था। किसानों को पांच लाख रुपये जमा करने से राहत मिल गई। इसके बाद आगरा के दिव्य भूमि एग्रीक्रोप प्रोड्यूसर कंपनी लि. ने मंडी-उपस्थल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। 

एफपीओ ने आपस के किसानों से यह जमीन पट्टे पर ली है। मंडी में किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। बल्कि यहां व्यापारियों से एफपीओ एक प्रतिशत मंडी शुल्क वसूलेगा। जिसमें 25 फीसदी हिस्सा एफपीओ को मिलेगा जबकि 75 फीसदी मंडी समिति को जाएगा।

तीन वर्ष के लिए मान्य अधिसूचना
मंडी सचिव एसके राघव ने बताया कि एफपीओ द्वारा विकसित यह पहली मंडी है। इस मंडी उप स्थल पर खाद्यान्नों, फलों व सब्जियों के थोक सौदों की खरीद-बिक्री की जा सकेगी। यह पूरी तरह मंडी की तरह काम करेगा और तय प्रक्रिया का पालन होगा। यह अधिसूचना तीन वर्ष के लिए मान्य है। आगे इसका नवीनीकरण कराया जा सकेगा।
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किसान मंडी के मुख्य फायदे
- आम किसानों को पास में मंडी व प्रतिस्पर्धात्मक कीमत मिलेगी। इससे उसका भाड़ा व समय बचेगा।
- एफपीओ के किसानों को न सिर्फ अपने उत्पादों की उचित मूल्य मिलेगा बल्कि एफपीओ के लाभांश में भी हिस्सेदारी होगी।
- मंडी में पोस्ट हार्वेस्ट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था होगी जिससे किसानों का उत्पाद में बिक्री देरी पर नुकसान कम होगा।  

किसानों की मंडी सपने साकार होने जैसा : मृणाल  
दिव्य भूमि एग्रीक्रोप प्रोड्यूसर कंपनी के सीईओ मृणाल अग्रवाल बताते हैं कि एफपीओ का मुख्य काम किसानों के उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराना है। इसके लिए काफी दिनों से प्रयासरत थे। मंडी की मंजूरी किसानों के सपने का साकार होने जैसा है। यह मंडी आगरा-ग्वालियर हाइवे पर ऐसे स्थान पर है जहां आगरा के साथ सीमावर्ती राजस्थान व मध्यप्रदेश के 30 किमी. क्षेत्र के करीब 40 गांवों किसानों को अपने उत्पादों की खरीद-बिक्री का अवसर मिल सकेगा। 

मृणाल बताते हैं कि वह होटल, ढाबों, प्रोसेसिंग यूनिट आदि को मंडी से सीधे आपूर्ति की योजना पर काम कर रहे हैं। इसी तरह फुटकर दुकानदारों का रजिस्ट्रेशन कर सीधे उनकी दुकान पर कृषि उत्पाद उपलब्ध कराएंगे। इससे मंडी में भीड़ कम हो सकेगी। उन्होंने बताया कि कोविड काल में उनका एफपीओ ‘फार्म टू होम’ की तर्ज पर सब्जियों की आपूर्ति कर चुका है। वह आगरा से विदेश में भी सब्जी की आपूर्ति शुरू करेंगे।
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