बुखार आने पर कराई थी भर्ती
सैंया क्षेत्र के निवासी सौदान सिंह ने बताया कि उनकी चार वर्ष की नातिन मानिका को बुखार के कारण 17 मार्च को बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। दो दिन बाद 19 मार्च को अल्ट्रासाउंड कराया। लिवर में फोड़ा बताते हुए ऑपरेशन करने के लिए बाजार से दवाएं मंगाई गई। रात में ऑपरेशन के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ती गई। आरोप है कि रात में तबीयत बिगड़ने पर ना डाक्टर आए, न नर्स। वेंटिलेटर पर भी शिफ्ट नहीं किया गया। एक पर्चा लेकर दवा लेने के लिए भेज दिया। वापस आए तो बच्ची की मृत्यु होने की जानकारी दी।
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बच्ची की हालत थी गंभीर
इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि बच्ची गंभीर हालत में आई थी, लिवर में फोड़ा था, उसे हटाने के लिए सर्जरी की गई। बच्ची को बचाने के हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन जान नहीं बच सकी। जो दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं वही बाजार से मंगाई गई होंगी।
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