वर्दी में बेटा-बेटी हो तो सिर फक्र से ऊंचा हो जाता है। गांव में कोई भी सेना और पुलिस में नहीं हैं। अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहता हूं। वह वर्दी पहनकर गांव में आएंगी तो पिता का ही नाम रोशन होगा। देश ही नहीं, समाज की सेवा का अवसर भी उन्हें मिलेगा।
मथुरा के छोटे से गांव ब्योंही के किसान हरेंद्र ने यह बात कही। वह अपनी दो बेटियों को परीक्षा दिलाने के लिए आए थे। छोटी बेटी आशु की पहली तो बड़ी बेटी सावित्री की दूसरी पाली में परीक्षा थी। हरेंद्र ने बताया कि बेटियां बीए कर रही हैं। उन्हें बचपन से ही बताया कि अपने पैरों पर खड़ा होना, जिससे कभी किसी दूसरे पर आश्रित न रहें। गांव में अन्य कोई लड़की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी नहीं कर रही है।
सेना और पुलिस भर्ती की सावित्री और आशु तैयारी कर रही हैं। वह हर दिन 12 घंटे तक पढ़ती हैं। एक बार चयन भी हो गया, लेकिन मोबाइल पर रिचार्ज नहीं होने की वजह से चयन की जानकारी नहीं मिल सकी। अगली परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सकीं।
सावित्री ने बताया कि गांव में लाइब्रेरी नहीं है। इसलिए 4 किलोमीटर दूर निजी लाइब्रेरी में पढ़ने जाती हैं। सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक वहीं पर रहती हैं। घर आने पर भी पढ़ाई करती हैं। उनका मानना है कि जिस किसी परीक्षा की तैयारी करें, उसे लगन के साथ करना चाहिए। तभी सफलता मिलती है। वह अपने पिता का सहारा बनना चाहती हैं। छोटा भाई अनमोल भी तैयारी में लगा है। वह शनिवार को परीक्षा देने आएगा।
बेटियां दे रही थीं परीक्षा, केंद्र के बाहर मां कर रही थीं इंतजार
बेटियों को लेकर मां-पिता आए थे। किसी ने निजी वाहन से तो किसी ने रोडवेज बस में सफर किया। बेटियां जब परीक्षा देने अंदर गईं तो बाहर बैठकर सभी इंतजार करते रहे। पाड़मसी, जसराना निवासी मधु शर्मा ने बताया कि बेटियों को पढ़ाओगे-लिखाओगे तभी आगे बढ़ेंगी। मेरी बेटी प्रिया कई घंटे पढ़ाई करती है। उम्मीद है कि पेपर अच्छा होगा। मैनपुरी निवासी अर्चना पांडेय ने बताया कि बेटी साक्षी को परीक्षा दिलाने के लिए आए हैं। 1 साल से परीक्षा की तैयारी कर ही है। इसके लिए कोचिंग में तैयारी कर रही है। उसे वर्दी पहनानी है। इसके लिए हर बार प्रयास करती रहेंगी। मथुरा की रहने वाली भगवती देवी ने बताया कि बेटी कुसुमलता को लेकर आई हैं। बेटी को आगे बढ़ाना चाहती हैं। इसलिए पुलिस में भर्ती कराना चाहती हैं। उसे सेवा करनी है।