कासगंज। सहावर पुलिस ने विशाखापट्टनम से कैंटर में भरकर तस्करी करके बरेली व उत्तराखंड की ओर ले जाए जा रहे गांजे के पैकेटों को बरामद किया है। पुलिस ने तीन तस्कर गिरफ्तार किए हैं। जबकि कई तस्करों के नाम प्रकाश में आए हैं। गाड़ी से कुल 15 क्विंटल 80 किलोग्राम गांजे की बरामदगी हुई है। जिसकी कीमत का पुलिस ने पौने दो करोड़ रुपये का आंकलन किया है। एसीएस होम ने इस बरामदगी पर पुलिस पार्टी को एक लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है।
पुलिस अधीक्षक बोत्रे रोहन प्रमोद ने इस तस्क री कांड का खुलास किया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एसओजी टीम और सहावर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चेकिंग के दौरान एक कैंटर लोडर गाड़ी यूपी 80 सीटी 4347 की तलाशी ली। तलाशी के दौरान गाड़ी में लोड पानी के टंकियों के अंदर गांजे के पैकेट रखे हुए थे। गाड़ी के पिछले हिस्से में रखे टैंक खाली थी। जबकि उसके बाद रखे टैंकों में गांजा के पैकेट भरे हुए थे। पुलिस ने कैंटर में सवार तस्कर देवदत्त पुत्र चरन सिंह निवासी गांव सेहत थाना बल्देव, जनपद मथुरा, कमल किशोर पुत्र फूल सिंह, विष्णु पुत्र गोपाल निवासी भरतपुर राजस्थान को गिरफ्तार किया है।
उन्होंने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला पंजीकृत किया है। उन्होंने बताया कि पूछताछ में तस्करों ने स्वीकार किया है कि यह सभी लोग विशाखापट्टनम से गांजा लेकर बरेली जा रहे थे। बरेली में दादा ठाकुर नाम के तस्कर को गांजे की सुपुर्दगी देनी थी। उन्होंने बताया कि कोडवर्ड पूछकर तस्करी के माल की डिलीवरी दी जानी थी। एसपी ने कहा कि यह पूरा नेटवर्क बरेली और उत्तराखंड के इलाकों में गांजे की तस्करी करता है। जो अन्य तस्करों के नाम प्रकाश में आए हैं उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें की जा रही हैं। शीघ्र ही इनके साथी भी गिरफ्तार किए जाएंगे। एसपी ने बताया कि एसीएस होम ने इस बड़ी सफलता पर एक लाख रुपये देने की घोषणा पुलिस टीम के लिए की है। इसके अलावा एडीजी जोन एवं डीआईजी अलीगढ़ ने भी पुलिस पार्टी के लिए पुरस्कार घोषित किया है।
मैदान से पहाड़ तक फैला है गांजा तस्करों का नेटवर्क
कासगंज। सहावर थाना पुलिस द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई सुर्खियों में छा गई है। तस्करों का जाल पहाड़ से लेकर मैदान तक फैला हुआ है। दक्षिण से ये तस्कर गांजा ले जाकर उत्तर के इलाकों में तस्करी करते थे। इन तस्करों का असली सरगना कौन है, यह तो अभी सामने नहीं आ पाया है, लेकिन बरेली के दादा ठाकुर का नाम अवश्य सामने आया है। पर्दे के पीछे छुपे दादा ठाकुर को तलाश निकालना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
जो तस्कर पकड़े गए हैं उनमें एक मथुरा और दो राजस्थान के हैं। इससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि तस्करी इनके द्वारा उत्तर प्रदेश के कई जिलों में की जा रही होगी, लेकिन छह तस्कर अभी तक या नहीं बता पाए हैं कि उनका असली सरगना कौन है। बस इतना जरूर बता दिया है कि वे दक्षिण के विशाखापट्टनम सहित अन्य क्षेत्रों से तस्करी के लिए गांजा लाते थे और उत्तराखंड में पहाड़ों पर इसकी तस्करी करते थे। अब पुलिस दक्षिण और उत्तराखंड में तस्करों के जाल को तोड़ने के लिए योजना बना रही है। इधर तस्करों द्वारा यह बताया गया है कि बरेली का दादा ठाकुर गांजे की खेप का इंतजार कर रहा था। यह नाम का कोड वर्ड है। इसी व्यक्ति को आपूर्ति देनी थी।
सवाल : क्या पहले से ही तैयार था रोड मैप
तस्कर सुनसान जंगल के रास्ते से अन्य जिलों से गुजरते हुए कासगंज की सीमा से भी जंगल से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि तस्करों के पास रोड मैप क्या पहले से ही तैयार था। उन्हें कासगंज से जंगलों का रास्ता बरेली की ओर जाने के लिए कैसे पता था। इस पहलू पर ही पुलिस जांच कर रही है।
दक्षिण से लेकर उत्तराखंड तक इन तस्करों का नेटवर्क फैला हुआ है। इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ा जाएगा। दादा ठाकुर कौन है इसका भी रहस्य जल्द ही खोल दिया जाएगा। - रोहन प्रमोद बोत्रे, एसपी
पुलिस टीम के ये रहे सदस्य
एसपी ने बताया कि सीओ शैलेंद्र परिहार के निर्देशन में सहावर के थाना प्रभारी राजकुमार सिंह, एसएसआई विवेक शर्मा, एसओजी टीम के प्रभारी मुकेश कुमार व अन्य सदस्यों ने इस मामले में कार्रवाई की और बड़े मामले का खुलासा किया। आगे भी पुलिस के इस तरह के चेकिंग अभियान निरंतर जारी रहेंगे।