बघेल की ओर से दिया गया यह हवाला
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री की ओर से अधिवक्ता केके शर्मा ने प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर हवाला दिया कि जब धरना और प्रदर्शन किया गया था, तब धारा 144 लागू नहीं थी। उपजिलाधिकारी एत्मादपुर का धारा 144 लागू करने का आदेश 30 अप्रैल 2016 का है। इसलिए केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अपराध नहीं बनता है। उन्हें केस से उन्मोचित किया जाए।
अभियोजन की ओर से विरोध करते हुए कहा गया कि केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने धारा 144 का सरेआम उल्लंघन किया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद उनकी ओर से उन्मोचित करने संबंधी प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए आरोप तय करने के लिए 28 मई की तिथि नियत कर दी।
कोर्ट ने आदेश में यह कहा
कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की है कि वास्तव में आरोपी ने कोई अपराध किया अथवा नहीं, यह विचारण की वस्तु है। मगर, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि उक्त अपराध में आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया दृढ़ रूप से प्रकट होती है। अत: आरोपी की ओर से प्रस्तुत प्रार्थनापत्र में दिए गए आधारों का निराकरण, विचारण (ट्रायल) से पूर्व किया जाना संभव नहीं है। विचारण के बाद ही दोनों पक्षों की दलीलों का निराकरण संभव है। अत: उन्मोचित प्रार्थनापत्र खारिज किया जाता है।