ट्रॉफी लेते हुए क्रिकेटर लवकुश (फाइल फोटो)
क्रिकेट में आगरा का एक उभरता हुआ सितारा उधार के बल्ले से रनों की बौछार कर रहा है। गरीब बच्चों की सहायता करने के बड़े-बड़े दावे करने वाली संस्थाओं को उसकी लाचारी नहीं दिख रही है।
10 साल का लवकुश बघेल मैच शुरू होने से एक दिन पहले इस पसोपेश में रहता है कि वो किसके बल्ले से मैच खेलेगा। हालांकि मैच शुरू होने तक कोई न कोई उसे खेलने के लिए अपना बल्ला दे देता है।
इसके बाद भी उसे यह अफसोस रहता है कि उसके पास अपना खुद का बल्ला नहीं है। ऐसा नहीं है कि लवकुश पर कभी बल्ला नहीं रहा। लेकिन उसका बल्ला पिछले एक साल से चटका हुआ है।
जल निगम में कार्यरत लवकुश के पिता कृपाल सिंह कुंडौल में बनी पानी की टंकी के पास बने एक कमरे में रहते हैं। परिवार में माता-पिता के साथ ही तीन भाई-बहन को भी इसी एक कमरे में रहना पड़ रहा है।
द इंटरनेशनल स्कूल आगरा में पढ़ाई के साथ ही लवकुश यहां क्रिकेट के गुण सीख रहा है। छठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे इस क्रिकेटर की प्रतिभा को देखते हुए स्कूल के निदेशक संजय कालरा ने उनकी फीस भी माफ कर रखी है।
सीधे हाथ का बल्लेबाज और राइट ऑर्म ऑफ स्पिनर लवकुश पिछले दो सालों से कई बड़े टूर्नामेंटों में रन बना चुका है। उसने कई मैचों में शानदार गेंदबाजी भी की है। कई बार मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज का खिताब भी उसके नाम रहा है।
कई खिताब किए अपने नाम
2016 में स्टूडेंट्स ओलंपिक में आठ साल की उम्र में तीन बार मैन ऑफ द मैच। इसी टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज भी रहा। 2017 में अंडर-14 जिला स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट में लखनऊ की टीम के खिलाफ 36 रन बनाए। पांच विकेट भी लिए।
इस छोटे क्रिकेटर ने 2018 में न्यूजीलैंड के क्रिकेट क्लब के खिलाफ 74 रनों की शानदार पारी खेली। दो विकेट भी लिए। इस मैच में मैन ऑफ द मैच का खिताब भी मिला।
टीसा के निदेशक संजय कालरा ने बतया कि इस बच्चे में क्रिकेट की जबरदस्त प्रतिभा है। इस प्रतिभा को आगे बढ़ाना टीसा का मकसद है। इसलिए इस बच्चे की फीस स्कूल की ओर से माफ कर दी गई है।