दर्द: बेटी से कहा है कि छोटे बैग में बेहद जरूरी सामान लेकर तैयार रहो
शास्त्रीपुरम निवासी संतोष सिंह ने बताया कि मेरी बेटी श्रेया सिंह यूक्रेन में डॉक्टरी की पढ़ाई पढ़ रही है। वह इवानो फ्रेंक्विक्स नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी में एमबीबीएस चतुर्थ साल की छात्रा हैं। शुक्रवार की दोपहर बेटी से फोन पर बात हुई तो उसने बताया कि मम्मी, भारतीय दूतावास से उनको संदेश मिला है कि एक छोटे बैग में बेहद ही जरूरी सामान रखकर तैयार रहें। पौलेंड या फिर हंगरी के रास्ते से भारत लाया जाएगा। बेटी की चिंता खाई जा रही है। दिल्ली हेल्पलाइन नंबरों पर भी फोन कर जानकारी कर रही हूं।
दास्तां: शुक्र है कि युद्ध से पहले ही यूक्रेन छोड़कर घर आ गया
विभव नगर के आदित्य शुक्ला ने बताया कि करीब बीते 10-15 दिन से ही यूक्रेन में दहशत का माहौल था। युद्ध की आशंका पर उन्होंने घर जाना ही उचित समझा। टिकट कराई और 20 फरवरी को वह यूक्रेन से भारत आए। अब समाचार पत्र और टीवी चैनलों पर वहां का हाल देखकर यही लगता है कि शुक्र है कि वह युद्ध से पहले आ गए। इनके पिता आरके शुक्ला और मां अर्चना शुक्ला को बेटे के घर आने पर राहत मिली है। बेटा ओडेसा नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी से एमबीबीएस चतुर्थ साल का छात्र है। उसके कई दोस्त पहले ही आ गए हैं।