जागकर काटी रात, हर धमाके से बढ़ती रहीं धड़कनें
हॉस्टल में जारी किया गया है अलर्ट, हर समय तैयार रहने की चेतावनी, घरवाले परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। रूस के हमले की वजह से यूक्रेन में बने हालातों का तनाव यहां एटा तक है। वहां रहकर पढ़ रहे छात्रों ने बृहस्पतिवार रात जागकर काटी। हॉस्टल प्रशासन ने अलर्ट जारी कर हर समय तैयार रहने की चेतावनी दी है। इधर, रूस के हमले तेज होने पर छात्रों के परिजन और अधिक चिंतित हैं। फोन कर वह जानकारी लेते हुए उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं।
शहर के जेल रोड निवासी गंगा सिंह कुशवाहा का पुत्र अभिषेक यूक्रेन के डेनिपर में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। शुक्रवार दोपहर के मां विमला ने अभिषेक से बात की। तो उसने बताया कि यह इलाका अभी तक शांत और सुरक्षित है। किसी भी तरह की आशंका के मद्देनजर हॉस्टल प्रशासन न अलर्ट जारी कर दिया है। कहा गया है कि यदि हूटर बजाया जाए तो तुरंत पास के शेल्टर होम में पहुंच जाएं। अपने साथ ज्यादा सामान न रखें। कब हूटर बज जाए और चलना पड़े, इसके लिए रात में सोए नहीं। किराये के फ्लैट में चार लोग रह रहे हैं। दूर होने वाले धमाकों की आवाजें रह-रहकर सुनाई दे रही हैं। निधौली कलां मार्ग के रहने वाले इंजीनियर नरेंद्र शाक्य के पुत्र अभिषेक भी डेनिपर में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। शुक्रवार को घर पर उनकी दादी रामवती चिंता में बैठी हुई थीं। बताया कि गर्मियों में अभिषेक आया था। अभी आने की बात चल रही थी। लेकिन वहां युद्ध छिड़ गया और वह फंस गया। हम लोगों को काफी चिंता है।
शहर के अरुणा नगर कालॉनी निवासी डॉ. ब्रजेश शाक्य और उनकी पत्नी संगीता शाक्य भी चिंता में बैठे हुए थे। बताया कि डेनिपर में उनकी पुत्री प्रेक्ष्या एमबीबीएस तीसरे वर्ष में है। हॉस्टल में अन्य छात्राओं के साथ मौजूद है। फोन पर हुई बात में उसने बताया कि आसपास तो शांति है, लेकिन दूर हो रहे बम धमाकों की आवाज वहां तक पहुंचती है तो डर लगता है। तीन मार्च की फ्लाइट की बुकिंग मिली थी, लेकिन युद्ध छिड़ने से यह रद हो गई। शांति नगर निवासी सूबेदार सिंह का पुत्र आनंद भी डेनिपर में ही मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। घर पर मौजूद उसकी शिक्षक बहन ने बताया कि पहले से ही अंदेशा जता दिया गया था। जिस पर आनंद ने खाने-पीने का सामान आदि लेकर रख लिया। आवास-विकास कॉलोनी में शुक्रवार सुबह चीफ फार्मासिस्ट नरेश सिंह शाक्य अपनी पत्नी सरोज शाक्य के साथ टीवी पर दिखाई जा रही युद्ध की खबरें गंभीरता से देख रहे थे। नरेश सिंह ने बताया कि डेनिपर में फंसे पुत्र अर्पित से फोन पर लगातार बात हो रही है। वह किसी तरह का खतरा भी नहीं बता रहा। लेकिन टीवी पर आ रही खबरों से डर लग रहा है। पता नहीं कितने दिन में समस्या का समाधन होगा और बच्चे वापस आएंगे। पिलुआ निवासी एक अन्य युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह सीमा से करीब एक हजार किमी दूर हैं। यहां के हालात पूरी तरह सामान्य हैं। भारत की सरकार ने घर वापसी के लिए दूतावास में पंजीकरण कराने को कहा है। जिस पर लोग वहां पहुंच रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि उनका पुत्र शांतनु सिंह ओडेसा में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। एक फ्लैट में अन्य लोगों के साथ रुका हुआ है। वहां हालात सुरक्षित हैं, लेकिन तनाव बना हुआ है।