आगरा में दो और लोगों ने कोरोना वायरस को मात दे दी है। इनको बृहस्पतिवार की रात को एसएन मेडिकल कॉलेज से छुट्टी दी गई। एहतियातन 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन के लिए कहा गया है। इससे पहले एसएन से तीन मरीज ठीक होकर जा चुके हैं।
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जीवनी मंडी निवासी सोनू कुशवाह दुबई से लौटकर आया था। यह तीन अप्रैल को भर्ती किया गया था। जबकि घटिया निवासी दीपक अग्रवाल को 31 मार्च को एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। इनकी दो रिपोर्ट लगातार निगेटिव आई थीं। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि दो मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिए गए हैं।
आगरा में 12 मरीज कोरोना वायरस को मात देकर घर पहुंच चुके हैं। खंदारी क्षेत्र के रहने वाले जूता कारोबारी के परिवार के पांच सदस्य व उनके कर्मचारी, उसकी पत्नी का दिल्ली में इलाज हुआ था। एसएन से कॉलेज संचालक का बेटा, आगरा कैंट क्षेत्र निवासी महिला और वाटर वर्क्स क्षेत्र के चिकित्सक का बेटा भी घर जा चुके हैं।
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कोरोना के एक भी मरीज में गंभीर लक्षण नहीं
कोरोना वायरस से जंग लड़ रहे मरीजों के लिए राहत की बात है। आइसोलेशन वार्ड में इलाज करा रहे 60 फीसदी मरीजों में जुकाम-खांसी और बुखार तक नहीं है। 35 फीसदी मरीजों में बुखार, जुकाम और खांसी है। पांच-छह मरीजों को छोड़कर किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं हैं।
60 फीसदी को जुकाम-खांसी और बुखार तक की शिकायत नहीं
एसएन मेडिकल कॉलेज में 45, बरौली अहीर में 26, खंदौली में 27, जिला अस्पताल में आठ और बाकी मरीज टूंडला-वृंदावन में भर्ती हैं। इनमें 70-75 मरीजों में बुखार, खांसी, गले में खराश भी नहीं है। 40-45 मरीजों में किसी को खांसी, जुकाम या सिर दर्द की परेशानी है। तीन से पांच मरीजों को कभी-कभी सांस लेने में परेशानी की शिकायत होती है।
रोजाना जांच और उनकी सेहत के हाल की रिपोर्ट बनती है। सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि चिकित्सकीय परामर्श में मरीजों का इलाज चल रहा है। इन्हें हेल्दी डायट और जरूरत की दवाएं दी जा रहीं हैं। इससे मरीजों की हालत लगातार बेहतर हो रही है। लोगों से यही अपील है कि घरों से कतई बाहर न निकलें और एक से डेढ़ मीटर की दूरी का फासला जरूर बरतें।
मरीजों को दी जा रही हर्बल टी और हेल्दी भोजन
कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में आयुर्वेद चिकित्सा का भी सहयोग लिया जा रहा है। मरीजों को हर्बल टी और दूध में हल्दी मिलाकर दी जा रही है। फल, सलाद और हरी तरकारी अनिवार्य रूप से भोजन का हिस्सा है। दवा, भोजन, चाय, फल और दूध का समय तय है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए मरीजों की रोजाना काउंसिलिंग भी करते हैं।
योग, अध्यात्म और सकारात्मक बातों से बढ़ा रहे इच्छाशक्ति
मरीज भी बीमारी से लड़ने का जज्बा दिखा रहे हैं। योग, अध्यात्म और सकारात्मक बातों से इच्छाशक्ति को मजबूत कर रहे हैं। चिकित्सकों की काउंसिलिंग के बाद मरीज भी एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाते हैं। गीत-भजन भी गुनगुनाते हैं।