उत्तर प्रदेश के आगरा में कोरोना वायरस का कहर थम नहीं रहा है। संक्रमितों की संख्या के साथ मृतकों का आंकड़ा भी बढ़ने लगा है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच बृहस्पतिवार की सुबह एक और बुरी खबर आई। एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 65 वर्षीय बुजुर्ग कोरोना मरीज की बृहस्पतिवार सुबह साढ़े नौ बजे मौत हो गई। वह गुर्दे की बीमारी से चार साल से जूझ रहे थे।
एसएन के चिकित्सकों ने मृत्यु की वजह हार्ट फेल (दिल का दौरा) बताई है। वह जमाती के संपर्क में आने से संक्रमित हुए थे। उन्हें दोपहर को पंचकुइयां कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
ताजनगरी में कोरोना संक्रमितों की मृतक संख्या पांच हो गई। इनमें तीन महिलाएं थीं। बृहस्पतिवार को दम तोड़ने वाले बुजुर्ग धूलियागंज (छत्ता) के निवासी थे। कोरोना संक्रमित होने पर दस अप्रैल को उन्हें एसएन में भर्ती किया गया था। यहां के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष गौतम ने बताया कि उनके गुर्दे फेल हो गए, उच्च रक्तचाप भी था। अचानक हार्ट फेल हुआ जिससे मौत हो गई।
किडनी का मरीज था संक्रमित
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने इसकी पुष्टि की है। आगरा में यह पांचवें संक्रमित की मौत है। इससे पूर्व चार संक्रमित दम तोड़ चुके हैं। इनमें तीन महिलाएं हैं। बुधवार रात को 19 और लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जिले में अब कुल संक्रमितों की संख्या 167 हो गई है। अब तक जिले में 2989 नमूने लिए गए। इनमें बुधवार को 209 नमूने लिए गए।
छत्ता क्षेत्र के रहने वाले 65 वर्षीय व्यक्ति में 10 अप्रैल को कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। शहर के एक निजी अस्पताल में उसकी डायलिसिस हुई थी। कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद उसे एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था।
बुधवार रात संक्रमित मरीज की तबीयत बहुत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने तमाम प्रयास किए, लेकिन उनकी जान बचाई नहीं जा सकी। बृहस्पतिवार सुबह तकरीबन साढ़े नौ बजे उसने दम तोड़ दिया।
167 संक्रमितों से 76 जमाती
आगरा जिले में अप्रैल माह में तेजी से कोरोना संक्रमण फैला है। मार्च माह में 12 मामले थे, जो अप्रैल में 167 हो गए। यानी 15 दिनों में 155 नए मरीज मिले। औसत देखा जाए तो हर दिन 10 से अधिक कोरोना मरीज मिल रहे हैं। संक्रमित जमातियों की संख्या 76 से अधिक है।
पूल टेस्टिंग होगी
आगरा के हॉटस्पॉट में बफर जोन से लिए नमूनों की पूल टेस्टिंग होगी। पांच-पांच नमूनों का पूल बनाया गया है। कुल 100 नमूने लिए गए हैं। हॉटस्पॉट के तीन किलोमीटर के रेड जोन के बाद के दो किलोमीटर के क्षेत्र को बफर जोन कहा जाता है। बफर जोन में रहने वाले सभी लोगों के नमूने लेकर जांच की जाएगी।