बाह। जैतपुर में चिकित्सा एवं साहित्य के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ने वाले डॉ. वीपी मिश्र अतीत की स्मृति में सोमवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। गीतों पर लोग मुग्ध हो उठे। कानपुर के लाल सिंह प्रहरी ने गीत सच्चे संत वही जो सरहद पर जूझा करते हैं, लहू चढ़ाकर सैनिक मां का मस्तक ऊंचा करते हैं देश के सैनिकों को नमन किया।
घिघोर के विनोद राजयोगी ने जाति-धर्म, भेदभाव, हर विवाद भूलकर देश के नाम पर एक होना चाहिए कविता से एकता का संदेश दिया। हाशिम फिरोजाबादी ने अपनी कविता ''''जिनके हाथों से तिरंगा, न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए'''' से राजनेताओं पर निशाना साधा। इटावा के नंदू भदौरिया ने गीतों से ब्रज की मिठास घोली। विनोद सांवरिया ने ''''प्रेम राधा भी है, प्रेम मीरा भी है, प्रेम कान्हा की बंशी का बृजधाम है'''' सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन में आगरा के डॉ. राजकुमार रंजन, शमीम कौशर, धौलपुर की रजिया बेगम जिया, गणेश शंकर विद्यार्थी, राजन भदौरिया ने काव्य पाठ किया। संचालन विनोद राजयोगी ने किया। इससे पहले डीआईजी मेरठ डॉ. वीरेशराज शर्मा, जेलर गाजियाबाद सीताराम शर्मा, समाजसेवी सुधीर दुबे ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। डॉ. वीपी मिश्र के बेटे डॉ. निखलेश मिश्रा, देवेंद्र शर्मा, राजेश मिश्रा, दिलीप शर्मा ने आभार जताया। इस दौरान शिक्षाविद डॉ. मदन गोपाल सिंह भदौरिया, रामसेवक शर्मा, दिवाकर दोनेरिया, राजबहादुर शर्मा, पप्पू पुरोहित, संजू तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, गुड्डू बिधोलिया, लालू तोमर, घनश्याम भारतीय, सोनू शर्मा, मुकेश राजपूत, कुलदीप भदौरिया, वसीम पठान, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरिओम पांडेय आदि मौजूद रहे।