लगा सकते हैं सप्तऋषि वन
नक्षत्र समूह में प्रमुख सात भारतीय ऋषि कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, जमदग्नि, विश्वामित्र, वशिष्ठ और गौतम से संबंधित पौधों से मिलकर सप्तऋषि वन बनते हैं। ये पौधे तुलसी, अगस्त्य, चिडचिडा, दूब, बेल, शमी और धतूरा हैं।
ये भी पढ़ें - पत्नी तो फरार हो गई: नौकरी पर गया था पति, वापस लौटा तो चला पता; दो बच्चों की मां कर बैठी शर्मनाक हरकत
नवग्रह वाटिका भी करती है कमाल
सूर्य ग्रह के लिए मदार (आक), सोम के लिए पलाश (ढाक), मंगल के लिए खैर, बुध के लिए अपामार्ग (लटजीरा), गुरु के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहु के लिए दूब और केतु के लिए कुश निर्धारित है। नवग्रह वाटिका भी कमाल करती है।
ये भी पढ़ें - पिता ने बेटे को दी दर्दनाक मौत: पहले पीटा फिर गला दबाकर ली जान, मारते समय नहीं कांपे हाथ; खुद ही पहुंचा थाने
नक्षत्र वाटिका से सुधारें नक्षत्रों की चाल
आप नक्षत्र वाटिका भी लगवा सकते हैं। इसमें 27 नक्षत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पेड़ों को एक वृत (सर्किल) में लगाया जाता है। ये नक्षत्र अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मेघा, पू. फाल्गुनी, उ. फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूला, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रावण, धनिष्ठा, शतमिषक, पू.भाद्रपद, उ.भाद्रपद और रेवती हैं। इन नक्षत्रों के लिए क्रमश: कुचिला, आंवला, गूलर, जामुन, खैर, काला तेंदू, बांस, पीपल, नागकेसर, बरगद, ढाक, पाकड़, रीठा, बेल, अर्जुन, कटाई, मौलश्री, चीड़, साल, जलवेतर, कटहल, मदार, छयोकर, कदंब, आम, नीम और महुआ के पेड़ लगाए जाने चाहिए।
ये भी पढ़ें - प्रेमी ने किया दुष्कर्म: जिस पर किया खुद से ज्यादा भरोसा, वो निकला दगाबाज; हकीकत जान चूर-चूर हुए अरमान