इन स्मारकों के समीप ही चौकोर पत्थर पर बना हुआ है नगर का मानचित्र भी उत्खनन में मिला था। जो सीकरी म्यूजियम में रखा हुआ है। हाणा महल का संरक्षण कार्य 2014 में और हाणा रानी के महल का संरक्षण कार्य कुछ दिन पहले भारतीय पुरातत्व विभाग ने 24 लाख रुपये की लागत से कराया है।
इतिहासकार डॉ. अमरनाथ पाराशर का कहना है कि इसको वाटर पवेलियन भी कहा जाता है। इतिहासकार प्रो. अटारिया ने इस इमारत का जिक्र अपनी किताब में किया है। बताया कि खूबसूरत इमारत नगर के कोने पर स्थित होने के चलते पर्यटकों की पहुंच से दूर है। इसके लिए एएसआई को मार्ग बनवाना चाहिए।