पहली बार टोरंट के पांच सालों के कामकाज का हिसाब-किताब सामने आएगा। पांच साल पहले शहर की विद्युत वितरण को संभालने आई फ्रेंचाइजी टोरंट पावर को अपनी उपयोगिता का जवाब देना होगा। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने लखनऊ के उपभोक्ता की याचिका पर दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है, जो पांच सालों में आगरा में लाइन लॉस, राजस्व वसूली, एरियर और उपभोक्ताओं को सहूलियत की जांच करेगी। दो महीने में यह कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी और इसे टोरंट के किसी भी एकाउंट, डेटा को देखने और जांच करने के अधिकारी आयोग ने दिए हैं।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम और टोरंट पावर के बीच हुए करार में तमाम खामियां होने के आरोप लगाते हुए लखनऊ निवासी रमाशंकर अवस्थी ने विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर की। इस याचिका की सुनवाई में नियामक आयोग चेयरमैन देश दीपक वर्मा, सदस्य इंदु भूषण पांडे और मीनाक्षी सिंह ने आदेश जारी किया है कि टोरंट को पांच सालों का हिसाब देना होगा। टोरंट के क्या फायदे और क्या नुकसान रहे हैं, इसकी जानकारी डिस्कॉम दक्षिणांचल और जनता को होनी चाहिए। दो सदस्यीय कमेटी टोरंट के टेक्निकल और कामर्शियल परफार्मेंस पर भी नजर रखेगी। आयोग ने कमेटी को इस बात की पूरी आजादी भी दी है कि वह टोरंट पावर से किसी भी डेटा और एकाउंट को लकर उनकी जांच और परीक्षण कर सकती है। दो महीने के अंदर इसकी रिपोर्ट आयोग के सामने पेश करनी होगी।
इन सवालों की करेगी जांच
- 2009-10 से अब तक साल दर साल लाइन लास में कमी ?
- 2009-10 से अब तक राजस्व वसूली में कितना अंतर ?
- फ्रेंचाइजी संभालने के बाद एरियर कितना प्राप्त हुआ ?
- फ्रेंचाइजी के बदलाव का फायदा उपभोक्ताओं को कितना मिला ?
कमेटी में होंगे ये शामिल
अरुण, रिटायर्ड ओम्बड्समैन और निदेशक यूपीपीसीएल
संदीप दास, चार्टर्ड एकाउंटेंट