शाम को दिल्ली से आई आश्रय गृह की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। इसी तरह स्टेशन पर अलीगढ़ के गांव भरतपुर का रहने वाला एक किशोर भी पिता की डांट से नाराज होकर घर से भाग आया था।
23 सितंबर को छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का किशोर भी ट्रेन से काम की तलाश में जमशेदपुर की जगह आगरा आ गया था। अलीगढ़ के किशोर को भी उसकी मां के सुपुर्द किया गया है। छत्तीसगढ़ का किशोर अभी चाइल्ड लाइन के पास है।
एक साल में 120 बच्चों को घर पहुंचाया
रेलवे चाइल्ड लाइन की स्थापना 15 जनवरी 2018 को हुई थी। इसके बाद से ही ट्रेनों से भागकर आने वाले बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम रेलवे चाइल्ड लाइन के सदस्य कर रहे हैं। इस कार्य में वह जीआरपी और आरपीएफ की मदद लेते हैं। कोआर्डिनेटर नरेंद्र परिहार का कहना है कि एक साल पूरा नहीं हुआ है, लेकिन अभी तक 125 में से 120 बच्चों को उनके घरों तक पहुंचाया जा चुका है।