धनौली-जगनेर रोड स्थित राजकीय बाल गृह में एक महीने पहले 18 सितंबर को निरीक्षण समिति के अध्यक्ष और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सर्वजीत कुमार सिंह ने जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) को निरीक्षण के बाद रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें बच्चों के पोषण पर सवाल उठाए गए थे।
निरीक्षण के 36 दिन बाद ही दो दिन के अंदर तीन बच्चों की मौत हो गई। बालगृह के अधीक्षक विकास कुमार का कहना है कि बच्चे प्री-मैच्योर थे और अचानक मौसम बदलने, ठंड आने से उनकी तबियत खराब हो गई थी।
'ठंड से बिगड़ी तबियत'
राजकीय बाल शिशु गृह के अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि तीनों बच्चे प्री मैच्योर थे, अचानक मौसम बदला तो ठंड से उनकी तबियत खराब हो गई। उस दिन मैं मौजूद नहीं था, इसलिए दूसरे कर्मचारी ने निरीक्षण समिति को लेक्टोजन पाउडर व खरीद रजिस्टर नहीं दिखाया।
एडीएम सिटी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी ने कहा कि तीन बच्चों की मौत हुई है। मामला मेरी जानकारी में है। हमें तो यही बताया है कि बच्चे प्री मैच्योर थे। सिटी मजिस्ट्रेट शेल्टर होम प्रभारी हैं आप उनसे बात कर लीजिए। मैं डीपीओ से कहता हूं। वो आपसे बात करेंगे।
'हमें कुछ नहीं बताते डीपीओ...'
सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार ने कहा कि मैं कोई प्रभारी नहीं हूं। जब कोई फाइल आती है तब देखता हूं। डीपीओ हमें कोई बात नहीं बताते। बच्चों की मौत कैसे हुई मुझे नहीं पता। अब आपने बताया है तो मैं मामले की जांच करूंगा।