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धवल चांदनी में सिंहासन पर विराजे केशवदेव, ठाकुरजी के जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

Sat, 31 Oct 2020 07:37 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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केशवदेव मंदिर में ठाकुरजी का श्रीविग्रह - फोटो : अमर उजाला
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श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम हुए। मल्लपुरा स्थित प्राचीन केशव देव मंदिर में शरद महोत्सव पर ठाकुरजी को श्वेत वस्त्र धारण कराकर रजत सिंहासन पर विराजमान कराया गया। प्राचीन श्री दीर्घविष्णु मंदिर में भी शरद महोत्सव मनाया गया। उधर, श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में दिव्य चंद्रलोक और छप्पन भोग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भक्तों ने अपने आराध्य के दर्शन किए। 

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केशव देव मंदिर में शनिवार की सुबह सेवायत अवध स्वरूप गोस्वामी, जगदीश गोस्वामी, गौरव गोस्वामी, मुन्नी लाल गोस्वामी ने संयुक्त रुप से मंत्रोच्चारण किया। इस बीच ठाकुरजी के श्रीविग्रह का दूध, दही, शहद, घी, बुरे और केवड़ा जल से अभिषेक कराया गया। सायंकालमें ठाकुरजी को स्वर्ण रजत निर्मित आभूषण धारण कराए। इसके बाद फूल बंगला में रजत सिंहासन पर ठाकुरजी को स्वेत वस्त्र धारण कराकर धवल चांदनी के बीच विराजमान कराया गया। 


श्रीकृष्णा सामूहिक संकीर्तन मंडल के मनमोहन सराफ, महेश गोयल ने राधा-कृष्ण स्वरूप धारण कर महारास की भूमिका निभाई। महेश टेंट वाले, विजय बंसल द्वारा गोपी रूप धारण कर भगवान के संग भजन प्रस्तुत किए। ठाकुर जी को 251 किलो मेवा, केसर युक्त खीर का प्रसाद लगाया गया। उधर, मधु मंदिर में विराजमान गिरिराज महाराज को भी श्वेत वस्त्र धारण कराया। इस दौरान रंग-बिरंगी लाइटों से मंदिर जगमगा उठा। 

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श्री दीर्घविष्णु मंदिर में भी मनाया गया शरद उत्सव

प्राचीन श्री दीर्घविष्णु मंदिर में ठाकुरजी का श्रीविग्रह - फोटो : अमर उजाला
प्राचीन श्री दीर्घविष्णु मंदिर में शनिवार को शरद महोत्सव मनाया गया। भगवान दीर्घ विष्णु को धवल वस्त्र, धवल शृंगार और धवल पुष्प धराए गए और मेवायुक्त खीर, रबड़ी-केसर, मेवा युक्त दूध का विशेष भोग लगाया गया। साथ ही शास्त्रीय धमार गायन किया गया। मंदिर के सेवायत महंत कान्तानाथ चतुर्वेदी ने कहा कि भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का यह विशेष उत्सव है। आज कार्तिक मास प्रारंभ हो रहा है। 

शरद पूर्णिमा पर दाऊजी मंदिर में ठाकुर जी को श्वेत वस्त्र धारण कराए गए। देर रात तक श्रद्धालु धवल चांदनी में ठाकुर जी के दर्शनों को उमड़ते रहे। दाऊजी महाराज के विशेष श्रृंगार में हीरा-जवाहरात धारण कराए गए। दाऊजी महाराज को विशेष प्रसाद के रूप में खीर का भोग लगाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर दाऊजी महाराज और रेवती मैया के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। 
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