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UP: 52 हजार लाइसेंस की जांच से कतरा रहे अफसर, फंस सकते हैं कई कर्मचारी; हो सकता है बड़ा खुलासा

Sun, 08 Jun 2025 03:40 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आरोपियों के तार मुख्तार अंसारी व अन्य गैंग से जुड़े बताए जा रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस की जांच कराने की कोई पहल नहीं की है।
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस केस में आरोपी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा में प्रशासन के रिकाॅर्ड में कितनी विदेशी पिस्टल व रिवाल्वर फर्जी दर्ज हैं। यह किसी को नहीं पता। अफसर बेखबर हैं। कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम सिटी कार्यालय में दर्ज भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष की अमेरिकन पिस्टल 18 साल बाद संदिग्ध निकली। इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता।
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध असलहों की खरीद-फरोख्त का खेल उजागर होने पर कलेक्ट्रेट में तैनात असलहा बाबू संजय कपूर सहित सात लोगों के विरुद्ध केस दर्ज हुआ। एसटीएफ जांच में जुटी है। आरोपियों का कनेक्शन मुख्तार अंसारी व अन्य गैंग से बताया जा रहा है। 

दूसरी तरफ इस गैंग ने भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष संदीप भदौरिया उर्फ श्याम भदौरिया को कूटरचित दस्तावेज से देसी फैक्टरी में 32 बोर की पिस्टल अमेरिकन बताकर 1.75 लाख रुपये बेची। यह पिस्टल 2007 से एडीएम सिटी कार्यालय के रिकाॅर्ड में दर्ज थी। एसटीएफ के खुलासा के बाद संदिग्ध पिस्टल बेचने के मामले में श्याम भदौरिया ने शिव कुमार के विरुद्ध केस दर्ज कराया है।
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सात दिन बाद भी कोई जांच नहीं
भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया को कूटरचित दस्तावेजों से बेची गई पिस्टल 18 साल तक एडीएम सिटी कार्यालय के रिकाॅर्ड में दर्ज रही। अफसरों को भनक तक नहीं लगी। 30 मई को केस दर्ज हुआ। लेकिन, सात दिन बाद भी प्रशासन ने रिकाॅर्ड में दर्ज संदिग्ध असलहों की जांच शुरू नहीं की। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार एक दर्जन से अधिक अवैध शस्त्र सरकारी रिकाॅर्ड में दर्ज हैं। पूरा खेल असलहा बाबू संजय कपूर की शह पर चल रहा था।

यूनिक आईडी से सत्यापन में भी घालमेल
जिले में 52 हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध असलहों की खरीद-फरोख्त कांड के बाद सभी लाइसेंस की जांच होनी थी। लेकिन, प्रशासन ने यूनिक आईडी से लाइसेंस का सत्यापन शुरू नहीं किया। सत्यापन में भी घालमेल का खेल चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक सत्यापन में बड़ा फर्जीवाड़ा खुल सकता है। जिसमें कई कलेक्ट्रेटकर्मियों के अलावा पीसीएस व आईएएस भी फंस सकते हैं। इसलिए अफसर सत्यापन से कतरा रहे हैं।
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