फतेहाबाद। तहसील के चाचीपुरा (खंडेर) निवासी पुष्पा देवी 14 अगस्त की शाम जब असहनीय प्रसव पीड़ा से कराहते हुए फतेहाबाद सीएचसी पहुंचीं तो उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी चौखट पर राहत मिलेगी। चार घंटे तक वह तड़पती रहीं। स्टाफ और डॉक्टर ने इलाज करने के बजाय परिजन को निजी अस्पताल का रास्ता दिखा दिया, जहां सामान्य प्रसव के नाम पर 28 हजार रुपये ले लिए गए। सीएचसी में इलाज नहीं मिलने पर पति ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।
पुष्पा के पति अजय कुमार ने बताया कि 14 अगस्त की शाम करीब छह बजे प्रसव पीड़ा होने पर वह पत्नी को एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहाबाद लेकर पहुंचे थे। अस्पताल पहुंचने के बाद करीब चार घंटे तक पत्नी प्रसव पीड़ा से तड़पती रहीं लेकिन किसी डॉक्टर या स्टाफ नर्स ने उनकी जांच तक नहीं की। सीएचसी में उपचार देने के बजाय स्टाफ ने उन्हें पत्नी को लेकर फतेहाबाद के एक निजी अस्पताल में जाने के लिए कहा। मजबूरी में वह पत्नी को लेकर वहां गए। पत्नी का सामान्य प्रसव हुआ। इसके लिए उनसे 28 हजार रुपये लिए गए। अजय ने आरोप लगाया कि सीएचसी के स्टाफ निजी अस्पताल से मिले हुए हैं। जिसके कारण महिलाओं को निजी अस्पताल भेजा जाता है।
निशुल्क हैं सेवाएं
प्रदेश में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को पूरी तरह निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के लिए सामान्य और सिजेरियन प्रसव पूरी तरह मुफ्त है। प्रसूता की सभी जांचें, दवाएं, खून की व्यवस्था और पौष्टिक भोजन बिना किसी शुल्क के देने का प्रावधान है।
बड़ा सवाल
जब सरकार हर स्तर पर मुफ्त इलाज दे रही है, तब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से प्रसूता को निजी अस्पताल में भेजकर 28 हजार रुपये खर्च कराने का खेल किसकी शह पर चल रहा है?
अस्पताल में है प्रसव की व्यवस्था
इस संबंध में मेरे पास अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। सीएचसी में प्रसव कराने की व्यवस्था है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला को किन परिस्थितियों में निजी अस्पताल जाने की सलाह दी गई।
डॉ. अभिषेक चौहान, सीएचसी अधीक्षक
दोषियों पर कार्रवाई होगी
मामला मेरे संज्ञान में आया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान सीएचसी में प्रसूता को समय पर उपचार न देने, निजी अस्पताल भेजने की भी पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में किसी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ या अन्य कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ आगरा