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नहीं मिली टिकट तो बागवत पर उतरे सपा के अपने

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मैनपुरी। पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य सीट के लिए सपा में बगावत शुरू हो गई है। सपा के निवर्तमान सदस्यों को नजर अंदाज कर नए प्रत्याशियों पर दाव लगाने के बाद छह निवर्तमान सदस्यों ने पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के विरोध में नामांकन कर दिया है। इससे राजनीति गरमा गई है।
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कई दशकों से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है। इस बार भी सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी अपने खाते में रखने के लिए चुनावी बिसात बिछा दी है। इसके लिए चुन-चुनकर जिले के 30 जिला पंचायत वार्डों से प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। चुनावी समीकरणों को देखते हुए सपा ने बढ़ी संख्या में निवर्तमान सदस्यों की अनदेखी कर नए प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है।
सपा समर्थित प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही निवर्तमान सदस्य व उम्मीद में बैठे अन्य कार्यकर्ता भी बगावत पर उतर आए। कुछ वार्डों में तो समझा-बुझाकर इस बगावती तेवर को दबा दिया गया। छह वार्डों में ये बगावत खुलकर सामने आ गई है।
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सुल्तानगंज ब्लॉक के वार्ड नंबर नौ, दस और वार्ड नंबर 11 के साथ ही कुरावली के वार्ड नंबर 14, किशनी के वार्ड नंबर दो समेत अन्य कई वर्डों में निवर्तमान सदस्यों व सपा के कट्टर कार्यकर्ताओं ने सपा समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोंक दी है। उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया। वार्ड नंबर 10 से सर्वाधिक सपा कार्यकर्ताओं ने नामांकन किया है। इससे यहां सपा समर्थित प्रत्याशी की राह मुश्किल हो सकती है।
दूसरे दल के प्रत्याशियों को मिलेगा लाभ
सपा का परंपरागत वोटर ही हर चुनाव में पार्टी के प्रत्याशियों की जीत का निर्णय करता है। विधानसभा चुनाव से ही ये वोटर जहां दो फाड़ हो गया है। अब निवर्तमान सदस्य और पार्टी के लिए समर्पितों की अनदेखी दूसरे दलों के प्रत्याशियों को लाभ पहुंचा सकती है। सपा समर्थित प्रत्याशी व पूर्व में सपा समर्थित रहे प्रत्याशियों के मैदान में आने से उनके वोट का विभाजन भी तय है।
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