आगरा। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव जला रहे हैं। इसके धुएं से फेफडों में संक्रमण और निमोनिया बन रहा है। तेज खांसी, बलगम में खून आने समेत सांस लेेने में परेशानी हो रही है। अस्थमा-सांस अटैक भी पड़ रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में 12 मरीज भर्ती हुए हैं। ओपीडी में भी डेढ़ गुना मरीज आ रहे हैं।
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि सोमवार को ओपीडी में 261 मरीज आए। 62 नए और 199 फॉलोअप मरीज रहे। इनमें फेफड़ों में संक्रमण और निमोनिया भी मिला। 87 मरीजों के तेज खांसी, सीने में जलन-जकड़न और बलगम में खून आने की परेशानी मिली। इनमें 80 फीसदी ऐसे मरीज रहे, जिन्होंने अलाव सेंकने के बाद हालत खराब हुई। कई तो ऐसे रहे, जिन्होंने कचरा, टायर या प्लास्टिक जलाई। धुएं में सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड समेत अन्य खतरनाक गैस होने से संक्रमण हुआ। इनमें से कई मरीजों को तो ऑक्सीजन देनी पड़ रही है।
मेडिसिन विभाग के डॉ. अजीत चाहर ने बताया कि ठंड लगने से सर्दी जुकाम, गले में खराश और तेज बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। खानपान बिगड़ने से कई मरीजों के मधुमेह और रक्तचाप अनियंत्रित मिल रहा है। 18 फीसदी मरीजों का बीपी बढ़ा हुआ मिल रहा है। इनको नियमित दवाएं लेने के साथ तले हुए भोजन से बचने की सलाह दे रहे हैं। हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमृत गोयल ने बताया कि ओपीडी 331 मरीज आए। इनमें 70 फीसदी के मांसपेशियों में दर्द, जकड़न, सूजन और घुटनों में दर्द की दिक्कत मिल रही है। ठंड में पुरानी चोट के दर्द भी परेशान कर रहे हैं।
पर्चे के लिए मारामारी, मरीजों की बढ़ी परेशानी
- एसएन में सोमवार को 3,335 मरीज पहुंचे। मरीज अधिक होने के कारण पर्चा, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने के लिए घंटों लाइन से गुजरना पड़ा। कई ऐसे भी मरीज रहे, जिनकी लाइन में लगने से हालत खराब हो गई।
डेढ़ घंटे में बन पाया पर्चा
- सांस लेने में दिक्कत होने पर एसएन दिखाने आया तो भारी भीड़ लगी हुई थी। घंटेभर लाइन में लगने के बाद नंबर आया। फिर डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने में भी इतना ही समय लगा। -प्रेमनाथ, छीपीटोला।
लाइन में लगने से हालत खराब
पर्चा, दवा और फिर जांच के लिए लाइन में लगना पड़ा। घंटों खड़े होने से परेशानी हुई। हालत भी खराब हो गई। पर्चा के लिए काउंटर बढ़ जाएं तो महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को बड़ी सुविधा हो जाएगी। -रुक्साना, मंटोला।
स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन, नेबुलाइजर के दिए निर्देश
- सीएमओ ने बताया कि वायु प्रदूषण से गर्भवती महिलाओं और अस्थमा पीड़ित बच्चों को भी परेशानी हो रही है। गर्भस्थ शिशु पर भी असर पड़ रहा है। मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में सीएचसी, जिला अस्पताल में ऑक्सीजन और नेबुलाइजर और दवाओं की उपलब्धता करने के निर्देश दिए हैं। एंबुलेंस सेवा को भी सतर्क किया है।
इन बातों का रखें ध्यान:
- हाथ सेंकने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर का उपयोग करें।
- अस्थमा-सांस रोगी तड़के घर से बाहर जाने से बचें।
- मास्क लगाएं और धूल-धुआं वाले स्थान से बचें।
- सीने में जकड़न पर गर्म पानी की भाप लें।
- गर्भवती महिलाएं जांच कराएं, धुआं से बचें।