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बार और बेंच के संयुक्त प्रयास से ही हिंदी का उत्थान संभव

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आगरा। अधिवक्ता समाज न्यायालय की प्रक्रिया के आदेश और निर्णय हिंदी में रूपांतरित करके अपने पक्षकारों को समझा सकते हैं। इस प्रकार से वो समाज में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। अधिवक्ताओं को हिंदी भाषा में कार्य करना चाहिए। बार और बेंच के संयुक्त प्रयास से ही हिंदी का उत्थान संभव है। सोमवार को दीवानी में आगरा बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित हिंदी दिवस समारोह में वक्ताओं ने यह कहा।
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समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में जनपद न्यायाधीश नलिन कुमार श्रीवास्तव रहे। उनके अलावा न्यायिक अधिकारी देवेंद्र वाजपेयी, सुब्रत मेहरा, नीरज गौतम, विजय कुमार शर्मा, लोकेश नागर, सैय्यद अमीर अहमद मौजूद रहे। वहीं संस्था अध्यक्ष प्रमोद कुमार शर्मा, सचिव रामप्रकाश शर्मा, बनवारी लाल अग्रवाल, गिरवर नरायन अग्रवाल, अनिल कुमार गोयल, विजय पाल सिंह चौहान, विजय आहूजा, संजय गुप्ता, अनिल कुमार तिवारी, शैलेंद्र रावत, अमिताभ शर्मा, मधुकर पाठक मौजूद रहे।
अधिवक्ता परिषद ने यूथ हॉस्टल में हिंदी दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठी की। अध्यक्षता सुभाष चंद गुप्ता ने की। मुख्य अतिथि लखनऊ हाईकोर्ट बैंच के अपर मुख्य महाधिवक्ता कुलदीप पति त्रिपाठी रहे। उन्होंने कहा कि हिंदी सरल होने के साथ ही सभी वर्गों और समाज को जोड़ने वाली भाषा है। इस दौरान डीजीसी सिविल राजेश कुलश्रेष्ठ, प्रेमचंद राव, धर्मेंद्र वर्मा, आलोक शर्मा, उत्तम सिंह बघेल, अशोक चौबे आदि मौजूद रहे।
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