आगरा। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच डीजल-पेट्रोल की किल्लत की खबरें आईं तो नगर निगम ने डीजल की खपत में कटौती के साथ वाहनों के प्रबंधन पर जोर दिया है। नगर निगम शहर से हर साल कूड़ा उठाने, मलबा हटाने, नालों की सफाई, फॉगिंग आदि कामों में उपयोग किए जा रहे वाहनों के लिए 22 करोड़ रुपये का डीजल खरीदता है। डीजल आपूर्ति में 20 फीसदी की कटौती के आदेश के बाद नगर निगम दोबारा से वाहनों का प्रबंधन और खर्च में कटौती करेगा।
नगर निगम अप्रैल से नालों की सफाई और फॉगिंग को शुरू कर रहा है। कूड़े की ढुलाई के बाद इन दोनों कामों पर सबसे ज्यादा डीजल खर्च होता है। ऐसे में अप्रैल से डीजल की मांग बढ़ेगी, लेकिन संकट की चर्चाओं के बीच निगम खपत में कटौती का प्रस्ताव बना रहा है। नालों की सफाई मैनुअल कराने के साथ मलबा एक बार में ही बड़ी गाड़ियों से उठाने की योजना है।
इसी तरह उद्यान समेत अन्य विभागों में वाहनों के संचालन में कमी की जा सकती है। निगम के पास 91 डंपर हैं, जिनसे ज्यादा से ज्यादा कूड़ा कुबेरपुर पहुंचाया जाएगा। मॉडल ट्रांसफर स्टेशन में कूड़ा कंप्रेस करके ले जाया जाएगा।
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सीधे आपूर्ति पर तीन रुपये छूट का प्रस्ताव
सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि तेल कंपनियों से डीलर की जगह सीधे खरीद का प्रस्ताव है। एक तेल कंपनी ने थोक खरीदार के रूप में तीन रुपये लीटर की छूट का प्रस्ताव दिया है। चारों जोन में अलग-अलग खरीद का भी प्रस्ताव है ताकि तेल संकट के बीच आपूर्ति में किसी एक पर निर्भर न रहा जाए। कोई कमी न हो, इसलिए चार डीलर तय किए जा सकते हैं। अगर तेल कंपनियों से छूट मिली तो निगम को बड़ी बचत हो सकती है। इस पर इसी माह फैसला होना है।