मैनपुरी में कोरोना की पहली लहर में जांच के लिए मारामारी रही। जिले से सैंपल जांच के लिए आगरा, लखनऊ भेजे गए। रिपोर्ट भी तीन से चार दिन बाद मिली। दूसरी लहर में व्यवस्था बदली। अब जिला अस्पताल में खुद की लैब है। जहां कोरोना की आरटीपीसीआर जांच होती है। जिला कोरोना की जांच में आत्मनिर्भर बना है।
मैनपुरी जिले में 14 मार्च 2020 को पहला कोरोना का केस मिला था। इसके बाद से लगातार जिले में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते गए। पहली लहर में इलाज से ज्यादा परेशानी जांच की रही। क्यों कि जिले में जांच की व्यवस्था नहीं थी। सैंपल मेडिकल कॉलेज लखनऊ, आगरा और फिर सैफई भेजे गए। शुरुआत में जांच रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन का समय लगा। इस बीच कई संक्रमितों की हालत भी बिगड़ी। दूसरी लहर में व्यवस्थाएं दुरुस्त हुईं। एंटीजन जांच की शुरुआत के बीच लैब स्थापित की गई। जिला अस्पताल स्थित लैब में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच हो रही है।
ट्रूनेट मशीन हुई स्थापित
-दूसरी लहर में कोरोना की जांच के लिए जिला अस्पताल में ट्रूनेट मशीन की स्थापना की गई। इसने भी स्वास्थ्य विभाग को राहत दी और मेडिकल कॉलेजों को भेजने जाने वाले सैंपलों की संख्या में कमी आई।
मैं कोविड लेवल टू अस्पताल का प्रभारी रहा हूं। पहली लहर में इलाज के साथ-साथ जांच को लेकर भी परेशानी थी। बाहर से जांच होने पर तीन से चार दिन में रिपोर्ट मिलती थी। अब व्यवस्था बदल चुकी है। मैनपुरी में एंटीजन के साथ ही आरटीपीसीआर जांच की व्यवस्था है।
डॉ. आरके सिंह, वरिष्ठ परामर्शदाता
कोरोना काल को कोई भी व्यक्ति जीवन भर भूल नहीं पाएगा। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने सीमित संसाधनों में काम किया है। अब मैनपुरी कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हम तैयार है। हमारे पास हर वह संसाधन है, जिसकी जांच और इलाज में जरूरत पड़ती है।
डॉ. पपेंद्र कुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी, कुचेला