कासगंज। आधुनिकता की दौड़ में आगे निकलने की होड़ ने पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डाले हैं। यही कारण है कि पर्यावरण की सेहत नहीं सुधर पा रही है और वातावरण की धुंध नहीं छंट रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक पूरी तरह गड़बड़ाया हुआ है। पर्यावरण प्रहरियों की जागरूकता भी रंग नहीं ला पा रही है।
जिले की आबोहवा बिगड़ी हुई है, जो सेहत पर दुष्प्रभाव डाल रही है। यह हवा सांस और हृदय रोगियों के लिए बेहद घातक है। वातावरण की सेहत भी खराब है। इस सब के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं बल्कि आज आधुनिकता की दौड़ में आगे निकलने की होड़ जिम्मेदार है। लोग हरियाली को भूल कंक्रीट के जंगलों को खड़ा करने की होड़ में लगे हुए हैं।
एक और तो कंक्रीट के जंगल बढ़ जाने से पेड़ पौधे कम हो गए। दूसरा जब भवनों का निर्माण होता है तब भी नियमों का पालन नहीं किया जाता। न तो पानी का छिड़काव कराया जाता है और न ही पौधरोपण पर विशेष बल दिया जाता। वाहनों से निकलने वाली गैसें वातावरण को बेहद प्रभावित किए हुए हैं। जब तक इस और हम जागरूक नहीं होंगे। तब तक बेहतर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर पाना आसान नहीं होगा।