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कुछ तो बात है इस ‘लाल बत्ती’ में

Fri, 06 Nov 2015 01:53 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हो चुका है। अब अध्यक्ष पद पाने की व्यूह रचना की जा रही है। राजनीतिक दल अपने दावे कर रहे हैं तो निर्दलीय भी ताल ठोक रहे हैं। निर्वाचित सदस्यों को अपने पाले में लाकर बहुमत जुटाने के लिए प्रलोभन दिए जा रहे हैं। कुर्सी कब्जाने को और भी तरीके आजमाइश हो रही है। वजह यह है कि इस लालबत्ती में कुछ खास बात है। जिला पंचायत के अधिकार भी बहुत हैं और आय भी।
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जिला पंचायत की आय के प्रमुख स्रोत हैं। शासन से मिलने वाली ग्रांट। नदियों के घाटों के ठेकों से आय। व्यवसायिक संपत्तियों से टैक्स।  मंडियों से होने वाली आय। ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञापन (होर्डिंग)।  कृषि फार्मों से टैक्स। जिला पंचायत क्षेत्र में मेले, हाट
जिला पंचायत के कार्यवाहक अध्यक्ष रहे लाल सिंह लोधी के मुताबिक जिला पंचायत का वार्षिक बजट करीब 25 करोड़ रुपये है। इसके व्यय के लिए साल में दो बार बैठक होती है। इस तरह पांच वर्ष में जिला पंचायत करीब 1.25 अरब रुपये खर्च करती है। विशेष परिस्थितियों में सरकारी अनुदान बढ़ भी सकता है। विकास कार्यों के प्रस्ताव में मासिक बैठके होती हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष को सुविधाएं
अध्यक्ष को कार पर लाल बत्ती लगाने का रुतबा तो मिलता ही है। इसके साथ ही उन्हें 10 हजार रुपये मासिक मानदेय, सरकारी कार, तीन कर्मचारी (अर्दली, चपरासी और माली) मिलते हैं। सुरक्षा गार्ड भी उपलब्ध कराया जाता है। सरकारी कार्यालय के अलावा कैंप कार्यालय की सुविधा मिलती है, जिसमें टेलीफोन, कंप्यूटर आदि की सुविधा होती है। सदस्यों को प्रति बैठक के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। गणेश यादव कहते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में मानदेय नहीं लिया है।
जिला पंचायत के कार्य
जिला पंचायत अध्यक्ष गणेश यादव का कहना है कि जिला पंचायत को ग्रामीण क्षेत्र में सड़क निर्माण, खड़ंजे, नाली नालियां, टिन शेड निर्माण, पेयजल की सुविधा सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
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