मैनपुरी। फर्जी बीएड डिग्री के मामले में बर्खास्त चल रहे बीएड डिग्रीधारकों को एक के बाद एक राहत मिल रही है। बीएड के फर्जी डिग्रीधारकों को ज्वाइनिंग कराने का आदेश हुआ, तो वहीं बीएड के टेंपर्ड अंकपत्र धारकों का वेतन देने के भी कोर्ट ने आदेश जारी कर दिए हैं। जिले में टेंपर्ड अंकपत्र वाले 34 शिक्षकों को शीघ्र राहत मिलने की उम्मीद है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-2005 में बीएड करने वालों की एसआईटी ने जांच की थी। जांच के दौरान जिले में तैनात 77 शिक्षकों के बीएड अंकपत्र और डिग्री फर्जी बताए थे। एसआईटी की रिपोर्ट पर बेसिक शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को 30 नवंबर 2019 को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। बर्खास्तगी के बाद ये शिक्षक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने स्टे दिया तो इन्हें बहाल कर दिया गया। हाईकोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट पर 26 फरवरी 2021 को बर्खास्तगी को जायज माना इसके बाद सभी शिक्षकों को फिर से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। एक जुलाई 2021 को सुप्रीम कोर्ट से मामले में स्टे हो गया। टेंपर्ड अंकपत्र वाले शिक्षकों को चार महीने का वेतन जारी करते हुए ज्वाइन कराने के निर्देश दिए गए। अगस्त 2021 से टेंपर्ड बीएड अंकपत्र धारक बिना वेतन के ही काम कर रहे थे। 25 फरवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पूरा वेतन देने के आदेश दिए। बीएसए ने कोर्ट का निर्णय आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग से मामले में राय मांगी है।
31 शिक्षकों की टेंपर्ड मामले में पूर्व में हो चुकी है बर्खास्तगी
भले ही बीएड के टेंपर्ड अंकपत्र वालों को कोर्ट ने राहत दे दी हो, लेकिन जिले में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और स्नातक में टेंपर्ड अंकपत्र वाले 31 शिक्षकों को पूर्व बीएसए रामकरन यादव ने बर्खास्त किया था। इन शिक्षकों को आज तक कोई राहत नहीं मिली है। ये शिक्षक सेवा से बाहर चले गए हैं। संबंधित शिक्षकों के विरुद्घ पूर्व बीएसए रामकरन यादव ने रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। हालांकि आज तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका।
बीएड के टेंपर्ड अंकपत्र धारकों को अगस्त से वेतन नहीं दिया जा रहा है। टेंपर्ड अंकपत्र धारकों द्वारा कोर्ट की प्रति सौंपी गई है, जिसमें कोर्ट ने उनको सवेतन कार्य कराने का आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद उच्चाधिकारियों से राय मांगी गई है।
कमल सिंह, बीएसए