डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी की जाली मार्कशीट के सहारे सहायक अध्यापक की नौकरी पाने वाले 4,500 युवकों में से 20 ने एसआईटी के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। इनमें से 10 लोगों ने कहा कि जाली मार्कशीट में सारी गलती कॉलेज और यूनिवर्सिटी की है।
उन्हें तो मार्कशीट जाली होने का पता भी एसआईटी का नोटिस आने के बाद चला है। एसआईटी ने अभी 500 शिक्षकों को नोटिस जारी किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने बीएड की जाली मार्कशीट के दम पर सहायक अध्यापक की नौकरी पाई है।
बयान देने वाले शिक्षकों में से दस बैंक ड्रॉफ्ट की कॉपी लेकर पहुंचे थे। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन शिक्षकों ने खुद को बेकुसूर बताया। उनका कहना था कि उन्होंने बाकायदा निजी कॉलेज में दाखिला लिया था। किसी को मैनेजमेंट कोटे में सीट मिली तो किसी को रिजर्व कैटेगिरी में।
कालेज ने उनसे जो पैसा मांगा, वह ड्राफ्ट से दिया। उसकी ही कापी लाए हैं। उन्होंने बीएड की परीक्षा देने का भी दावा किया। उनका कहना था कि उन्हें एसआईटी की जांच शुरू होने के बाद पता चला कि निजी कालेजों ने जाली मार्कशीट दी। लेकिन तब यह आभास नहीं था कि उनकी मार्कशीट भी जाली है।
उधर, एसआईटी ने इन्हें आरोपी बनाने की तैयारी कर ली है। गौरतलब है कि इन शिक्षकों की मार्कशीट का ब्योरा यूनिवर्सिटी के गोपनीय चार्ट में तो दर्ज मिला था लेकिन न कापियां मिली थीं, न ही एनरोलमेंट नंबर। जांच में पाया कि इन्हें जाली मार्कशीट देकर ब्योरा गोपनीय चार्ट मेें दर्ज कराया गया।
एसआईटी इन सभी शिक्षकों को बर्खास्त कराकर इन्हें आरोपी बनाने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि 83 निजी कालेजों ने आवंटित सीटों से अधिक दाखिले देकर जाली मार्कशीट तैयार कराई थीं। इसके बाद बगैर दाखिले दिए मार्कशीट बेची गई।
हाईकोर्ट में सुनवाई आज
इस मामले में उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश की अदालत में सोमवार को सुनवाई होनी है। इस पर यूनिवर्सिटी की नजरें हैं। एसआईटी ने हाल में ही केस दर्ज किया है, जिसमें यूनिवर्सिटी के अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं।