उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गठिया तो उम्रदराज लोगों की बीमारी है। लेकिन इन बीमारियों नींव बचपन से ही रखनी शुरू हो जाती है। बच्चों को चिकनाईयुक्त भोजन, जंक-फास्ट फूड तो भरपूर दिया जाता है, लेकिन लाड़-प्यार में शारीरिक परिश्रम वाले खेल नहीं कराए जाते।
नतीजतन, वजन और उम्र बढ़ने के साथ कम उम्र में ही बीमारियां घेर लेती हैं। जीरियाट्रिक सोसाइटी आफ इंडिया की कांफ्र्रेंस में विशेषज्ञों ने बुजुर्गों में कई बीमारियों के लिए बचपन में ऐसे लाड़-प्यार को भी जिम्मेदार माना। ताज रोड स्थित होटल में आगरा डायबिटीज फोरम की ओर से आयोजित 12वीं कांफ्रेंस के समापन पर 12 को फेलोशिप दी गई।
हार्टअटैक से हर साल 25 लाख की मौत, सर्वाधिक बुजुर्ग।
दिल्ली के डा.,एससी मनचंदा ने बताया कि 10 साल की उम्र से ही हृदय रोग पनपने लगता है। फास्ट फूड के आदी बच्चों को 35-40 की उम्र तक हृदय की नसें संकुचित होने लगती हैं।
वयस्क होने पर धूम्रपान का शौक और बड़ा खतरा है। डायबिटीज फोरम के सचिव डा. सुनील बंसल ने बताया कि 60 की उम्र के इतने ही फीसदी ब्लड प्रेशर रोगी, अधिकांश डायबिटिक भी।
बचपन से ही पौष्टिक आहार, स्वस्थ जीवन शैली पर जोर दिया जाए। कांफ्रेंस में पद्मश्री डा. डीके हाजरा, डा. अतुल कुलश्रेष्ठ, डा. पद्मा हाजरा ने भी व्याख्यान दिया।
योग करें तो तकलीफदेह नहीं होगा बुढ़ापा
बचपन से ही योग किया जाए तो हृदय रोग, डायबिटीज, तनाव, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियाें से काफी हद तक बचा जा सकता है। डा. मनचंदा ने बताया कि उन्होंने 100 मरीजों पर रिसर्च किया।
50 मरीजों को दवा के साथ योग कराया गया। साल भर के बाद योग करने वाले मरीजों का परिणाम बेहतर रहा। योगाचार्य फादर जॉन फरेरा ने आसन, प्राणायाम और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करने की सीख दी।
‘ब्रेन डेड तो मिले इच्छामृत्यु’
कांफ्रेंस में चिकित्सकों ने इच्छामृत्यु के लिए कानून की मांग की। पुणे की डा. अनीता बसावराज ने बताया कि ब्रेन डेड (मृत मस्तिष्क) होने पर मरीज को इच्छामृत्यु दी जानी चाहिए।
ऐसी हालत में मरीज के ठीक होने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। परिजन भी खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं होते। कानून का दुरुपयोग न हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल बनाया जाए।
लोगों को किया जागरूक
पब्लिक टॉक कार्यक्रम में बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर सोसाइटी बनाने का निर्णय हुआ। यहीं अधिवक्ता प्रदीप सहगल ने कानूनी और डा. नेविल स्मिथ ने सामाजिक प्लानिंग के बारे में जानकारी दी। डा. एके प्रसाद, डा. अनिल, डा. जयंत पांडे ने भी विचार रखे।