आगरा। लोहामंडी थाने में जीएसटी विभाग की ओर से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले से कर चोरी का एक और मामला दर्ज कराया गया है। पंजीकरण के लिए फर्म ने बिजली का फर्जी बिल और किरायानामा लगाया था। जांच में वह अस्तित्व में नहीं पाई गई। फर्जी फर्म के स्वामी पर तकरीबन 19.39 करोड़ की राजस्व क्षति का आरोप है।
राज्य कर खंड तीन के उपायुक्त सतेंद्र कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि ट्रांस यमुना की फर्म मनिका इंटरप्राइजेज की जांच सितंबर 2023 में की गई थी। फर्म के पंजीकरण के लिए टोरंट का बिल लगाया गया था। इसमें आयरन स्टील का स्क्रैप, पेपर रद्दी की खरीद बिक्री करना दर्शाया था। साथ ही किरायानामा भी दिया था। फर्म की स्वामी मनिका थीं। फर्म की जांच में सामने आया कि पंजीकरण में जो पता दर्शाया गया था, उस पते पर कोई फर्म नहीं थी।
जिस व्यक्ति का भवन था, उसने भी फर्म संचालन की जानकारी से मना कर दिया। वह फर्म स्वामी को भी नहीं जानते थे। कभी कोई माल की लोडिंग और अनलोडिंग नहीं हुई थी। भवन स्वामी ने अपना शपथपत्र भी दिया कि उन्होंने कोई किरायानामा नहीं बनाया है। पंजीकरण के लिए लगाए गए दस्तावेज फर्जी निकले।
इसके बावजूद बिक्री (आउटवर्ड सप्लाई) घोषित की गई, खरीद (इनवर्ड सप्लाई) घोषित नहीं की गई। जबकि मालिक आईटीसी क्लेम कर रहे थे। जांच में सामने आया कि आईटीसी का लाभ लेने के लिए सिर्फ बिल और ई वे बिल का आदान-प्रदान किया गया। इस प्रकार आईटीसी न होते हुए भी बोगस आईटीसी 11 फार्मों को पासऑन की गई। इस तरह 19.39 करोड़ की राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज सहित अन्य धारा में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
लगातार मामले आ रहे सामने
जीएसटी विभाग को राजस्व की हानि पहुंचाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दो दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज चुकी है। कई मामले में संचालकों के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।