आरोपी नवजात बच्चों के सौदागरों को जेल भेजती पुलिस
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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से दो कार में पकड़ी गईं कोख की सौदागर दो महिलाओं सहित पांच लोगों के तार नेपाल के गैंग से जुड़े हुए हैं। सरगना नेपाल की ही एक हॉस्पिटल संचालिका है। वह कोख का सौदा सात से आठ लाख रुपये में करती है। आधी रकम एडवांस में दी जाती है। बाकी रकम बच्चा मिलने के बाद।
फरीदाबाद में सक्रिय गैंग की स्थानीय सरगना महिला गरीब और जरूरतमंद महिलाओं से सरोगेसी के माध्यम से बच्चे पैदा कराती हैं। इसके बाद नेपाल में दे आती हैं। आरोपियों से पूछताछ में गैंग के अन्य सदस्यों के नाम सामने आए हैं। पुलिस की एक टीम फरीदाबाद भेजी जाएगी। वहीं पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
खुलासा: फोन पर ऑर्डर लेते थे 'कोख के सौदागर', चार से पांच लाख में बेचते थे बच्चे
शुक्रवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली थी कि मानव तस्करी करने वाले गैंग के सदस्य फतेहाबाद होते हुए लखनऊ एक्सप्रेसवे से जाएंगे। इस पर पुलिस ने टोल के पास चेकिंग की। टाटा इंडिगो और टाटा टियागो गाड़ी को रोका गया। टाटा इंडिगो में दो लोग और एक महिला मिले। इनमें चालक नई दिल्ली के बदरपुर निवासी अमित, नई दिल्ली के हर्ष विहार निवासी राहुल और फरीदाबाद के धीरज नगर निवासी रूबी थीं। उसमें एक नवजात बच्ची भी थी।
उनके पास से गेटवेल मेडिसेंटर की मेडिकल रिपोर्ट मिलीं। वहीं टाटा टियागो में चालक प्रदीप कुमार निवासी धीरज नगर, फरीदाबाद और गिरधावर एन्क्लेव निवासी नीलम थे। महिला के पास से दो नवजात बच्ची मिलीं। इनके पास धरम देवी हॉस्पिटल की रिपोर्ट मिलीं। यह दस्तावेज बच्चा पैदा होने से संबंधित थे।
जरूरतमंद महिलाओं को देती हैं लालच
एसपीआरए पूर्वी प्रमोद कुमार के मुताबिक, पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी रूबी और नीलम ने बताया कि वह ऐसी महिलाओं को जाल में फंसाती हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है। पति से अलग रहती हों। उन्हें रुपयों का लालच दिया जाता है। इसके बाद जरूरतमंद लोगों के स्पर्म उनके गर्भ में धारण करा देती थी। इसमें डॉक्टर भी शामिल रहते हैं।
उन महिलाओं से बच्चे पैदा कराकर उन्हें तीन से चार लाख रुपये देकर बच्चों को ले लेती थी। उन्हें नेपाल की सरगना को देकर सात-आठ लाख रुपये लेती थी। बरामद हुई बच्चियों का जन्म एक माह पहले हुआ था। लॉकडाउन के कारण वह इन्हें नहीं सौंप पाई थी। इनके जन्म से संबंधित कागजात फरीदाबाद के सेक्टर 19 में धर्म देवी हॉस्पिटल और गेटवेल हॉस्पिटल से बनवाए थे।
अस्मिता है पूरे गैंग की सरगना
आरोपी नीलम ने बताया कि विदेश में लड़कियों की अच्छी मांग है। वह लोग इनसे अमर्यादित कार्य कराते हैं। कई दंपतियां भी लेती हैं। नेपाल में बच्चियों को अस्मिता नाम की महिला के सुपुर्द करना था। पूरे गैंग की सरगना वही है। उसका एक हॉस्पिटल है।
वह रुपये देती है। पहले एडवांस में रकम दी जाती है। बच्चा मिलने पर पूरी रकम दे देते हैं। अस्मिता से संपर्क मोबाइल से ही होता है। उसके पते के बारे में किसी को नहीं पता है। रुपये कैश और खाते में लेते हैं। बच्चा पैदा करने वाली महिलाओं को चार लाख रुपये मिलते थे, जबकि चार लाख रुपये गैंग के अन्य सदस्यों को दिए जाते थे। फरीदाबाद में गैंग की स्थानीय सरगना नीलम है।
नवजात बच्चियों को भेजा शिशु सदन
एसपी आरए पूर्वी प्रमोद कुमार ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ धोखाधड़ी, बच्चों की देखभाल व संरक्षण अधिनियम, बच्चों की तस्करी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। महिलाओं और युवकों को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया। तीनों नवजात बच्चियों को बाल कल्याण समिति के निर्णय के बाद बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया है। गैंग के तार नेपाल और फरीदाबाद से जुड़े हुए हैं। इसलिए एक टीम को पहले फरीदाबाद भेजा जाएगा। इस गैंग कई लोग शामिल हैं। इनके बारे में पड़ताल की जाएगी। गैंग के सदस्य एनसीआर में सक्रिय है। आरोपियों पर शिकंजा कसा जाएगा।