सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दिए जाने के बाद भी जेल अधिकारियों की ओर से आगरा जेल में बंद 13 दोषियों को रिहा करने में देरी का स्वत: संज्ञान लिया है। ये 13 वे लोग थे जो वारदात के समय नाबालिग पाए गए थे और पिछले 14 से 23 वर्ष से खूंखार अपराधियों के साथ जेल में बंद थे।
चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस एल नागेश्वर राव और एएस बोपन्ना की पीठ शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। गत आठ जुलाई को जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने आगरा सेंट्रल जेल में बंद 13 दोषियों को अंतरिम जमानत देते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश पारित किया था। इसके बाद 13 जुलाई को वकील ऋषि मल्होत्रा ने पीठ को बताया था कि 13 में से 12 लोगों को 12 जुलाई को छोड़ दिया गया था और एक को 13 जुलाई को रिहा किया जाएगा।
13 जुलाई को किए गए रिहा
अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर किए जाने के बाद किशोर न्याय बोर्ड को कैदियों की किशोरावस्था से संबंधित आवेदनों का निपटारा करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सभी कैदियों को अपराध के समय नाबालिग घोषित किया गया था। आदेश के बावजूद इन बंदियों को रिहा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जेल में बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
केंद्रीय जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि 12 बंदियों को मंगलवार को रिहा कर दिया गया। एक बंदी को 24 जून, 2021 को आगरा से बरेली केंद्रीय जेल शिफ्ट कर दिया गया था। बंदी की अंतरिम जमानत का आदेश भेज दिया गया। उसकी भी रिहाई कर दी गई। बंदियों में से दो गाजियाबाद, छह बुलंदशहर, दो जेपी नगर और एक-एक बागपत, आगरा और मुरादाबाद के हैं। परिजनों को बुलाकर बंदियों को सौंपा गया।
आगरा: केंद्रीय जेल से 12 बंदियों की अंतरिम जमानत पर रिहाई, अपराध के वक्त थे नाबालिग