ये प्रकिया अपनाई जाएगी
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर का कहना है कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन हेल्प डेस्क का आईकॉन दिया हुआ है। इस पर छात्र-छात्राओं को क्लिक करना होगा। उनके सामने विकल्प आएगा कि वह किस तरह की समस्या का समाधान चाहते हैं। इसमें अंकपत्र में संशोधन (नाम, माता-पिता के नाम, रोल नंबर, प्राप्तांक, विषयों की गलती आदि), पीएमडब्ल्यू, पीएमडब्ल्यू आदि समस्याओं के समाधान के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।
आवेदन करने पर एक शिकायत नंबर मिलेगा। वहीं, आवेदन के साथ ही जरूरी प्रमाण पत्रों को अपलोड करना होगा। छात्र-छात्राओं को अपने मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी देनी होगी। यदि आवेदन में कोई कमी होगी तो हेल्प डेस्क का स्टाफ उसे देखने के बाद आवेदक को फोन या ई-मेल के माध्यम से सूचित कर देगा। जरूरी प्रमाण पत्र मंगा लेगा। जो आवेदन पूरी तरह से सही होंगे, उन्हें एजेंसी को ठीक करने के लिए भेज दिया जाएगा।
शिकायत नंबर से आवेदन को ट्रैक भी कर सकेंगे
ऑनलाइन हेल्प डेस्क पर आवेदन के बाद छात्र-छात्राएं जो शिकायत नंबर मिलेगा, उसे डालकर समस्या के समाधान की स्थिति भी पता कर सकेंगे। वहीं, जिन छात्रों को ऑनलाइन आवेदन में कोई समस्या आती है और वह हेल्प डेस्क पहुंचते हैं, तो उनसे प्रार्थनापत्र लेकर ऑनलाइन कर दिया जाएगा।
दूसरे जिले के छात्रों को स्पीड पोस्ट से भेजे जाएंगे अंकपत्र
जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि अंकपत्र में संशोधन होने के बाद दूसरे जिलों के छात्र-छात्राओं को स्पीड पोस्ट से अंकपत्र भेज दिए जाएंगे। वहीं, जिले के छात्र-छात्राओं को फोन से बता दिया जाएगा, वह हेल्प डेस्क पर पहुंचकर अपना अंकपत्र ले सकेंगे।