'सिर, पेट, हाथ-पैर और छाती में 26 जख्म'
प्रमुख अधीक्षक डॉ. अशोक अग्रवाल ने बताया कि पैर से सिर तक कुत्तों ने काट खाया है। पेट, छाती, हाथ-पैर, सिर, गर्दन यहां तक कि जांघ और गुप्तांग से भी मांस नोंच लिया है। पूरे शरीर पर 26 जख्म मिले हैं। सबसे ज्यादा 19 जख्म कमर से नीचे के हिस्से पर हैं। तीन इंच तक के जख्म हैं। बच्ची के 36 टांके भी लगाने पड़े हैं।
'रक्त चढ़ाया, एआरवी भी लगवाया'
मुख्य अधीक्षक डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि बच्ची के एआरवी लगाने के साथ रक्त की एक यूनिट चढ़ा दी है। संक्रमण से बचाने के लिए रैबीफ्लू इंजेक्शन भी लगाए गए हैं, इस इंजेक्शन की कीमत दो हजार रुपये है। इसे शासन उपलब्ध नहीं कराता, लेकिन बच्ची की हालत देख इसे अतिरिक्त फंड से खरीदा गया है।
'मां नहीं है, दादी के साथ रहती है गुंजन'
बच्ची की मौसी गुड़िया ने बताया कि गुंजन की मां नहीं है। करीब नौ साल पहले ही मेरी बहन नीतू का देहांत हो गया था। इससे बड़ा 14 साल का बेटा है, जो अपनी बुआ के साथ रहता है। यहां गुंजन अपने पिता और दादी के साथ रहती है। अक्सर वह घर के बाहर खेलती है, ईश्वर की कृपा है कि वक्त रहते लोगों ने उसे बचा लिया।
कुत्ते-बंदर के हमले से हर महीने 11892 मरीज
एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) सेल के डॉ. मोहित कुमार ने बताया कि बीते महीने में 11892 मरीज कुत्ता-बंदर काटे के आए। औसतन रोजाना 400 मरीज रहते हैं। इसमें से 70 फीसदी मरीज कुत्ते के हमले से घायल होते हैं। इनको परीक्षण करने के बाद एआरवी की डोज तय करते हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण एआरवी की भी किल्लत रहती है।