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श्रीराम मंदिर निर्माण: जाति मजहब से दूर होकर श्रीराम के काम में जुटे मुस्लिम, पत्थरों पर उकेर रहे आकर्षक शिल्प

Fri, 27 Oct 2023 12:31 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, प्रमोद सिंघल

सार

आगरा के फतेहपुर सीकरी में भी श्रीराम मंदिर में शोभायमान होने वाले पत्थर गढ़े जा रहे हैं। इनकी नक्काशी इतनी शानदार है कि देखते ही रह जाएंगे। 
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UP: अयोध्या ही नहीं यहां भी गढ़े जा रहे श्रीराम मंदिर में शोभायमान होने वाले पत्थर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ताजनगरी आगरा में श्रीराम मंदिर में शोभायमान होने वाले पत्थर गढ़े जा रहे हैं। यहां पर शिल्पी अपने हाथों से पत्थरों पर नक्काशी उकेर रहे हैं। इनकी कारीगरी देखकर लोग देखते ही रह जाते हैं। मंदिर में लगने वाले यह पत्थर बेहद आकर्षक तरीके से सजाए जा रहे हैं। पत्थर गढ़ने की यह कार्यशाला फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के दूरा गांव और खेरागढ़ क्षेत्र के नगला कमाल में चल रही है।

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14 जून 2023 से दूरा गांव में जय कॉन्सट्रक्शन एंव राजपूत इंटरप्राइजेज द्वारा कार्यशाला चलाई जा रही है। इसमें लगभग 65 शिल्पी (कारीगर) अपनी कला से श्रीराम मंदिर के लिए पत्थरों को गढ़ रहे हैं। यहां तैयार किए जा रहे पत्थरों में कमल की नक्काशी में छत, पिलर सेट, खरसल कुम्भी, पिलर, कांटासरा, ठेकी, भेटसरा, बीम, सिल, कढ़ाउ, दासा प्रमुख हैं। 

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इसमें लगे पत्थर शिल्पी दिन रात मेहनत करके अपनी कला से पत्थरों में जान डाल रहे हैं। वह पत्थरों की कटाई के लिए बिजली की मशीनों के साथ छेनी, हथौड़े का प्रयोग कर रहे हैं। साथ ही बारीक कलमों का उपयोग करके बारीकी से पत्थरों पर नक्काशी उकेर रहे हैं। 

कारीगरों को योग्यतानुसार एक हजार से डेढ़ हजार रुपये तक का पारश्रमिक दिया रहा है। महिला मंजू व सोमवती भी शिल्पियों की मदद में लगी हुई हैं। वह पत्थरों की पालिशिंग व घिसाई का काम करती हैं। वहीं मुस्लिम कारीगर हमीद खां, नसरू खां, रफीक खां, सददाम खां व नहनू खां भी श्रीराम मंदिर में लगने वाले पत्थरों को गढ़ने में योगदान दे रहे हैं। वह अपनी कला से नक्काशी किए गए पत्थरों में रंग भर रहे हैं।

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UP: अयोध्या ही नहीं यहां भी गढ़े जा रहे श्रीराम मंदिर में शोभायमान होने वाले पत्थर - फोटो : अमर उजाला
हस्तशिल्पी व कार्यशाला के सुपर वाइजर किशन स्वरूप बताते हैं कि यह पत्थर वंशी पहाड़पुर से आता है। बयाना में लगी स्पीटिंग कटर मशीन से काटा जाता है। इसके बाद यहां लाया जाता है। श्री राम मंदिर के परकोटे के लिए यहां पर निरंतर काम चल रहा है। बताया कि अब तक लगभग पांच हजार घन फीट पत्थर गढ़ जा चुका है। वह अयोध्या भेजा जा चुका है।

कारीगर हमीद खां ने कहा कि श्रीराम तो पूरी दूनिया के हैं। हम जाति, धर्म के चक्कर में नहीं पड़ते। हमारी सुबह तो राम-राम से ही होती है। नसरू खां कहते हैं कि हम गांव के रहने वाले लोग हैं। सब मिल-जुल कर रहते हैं। सभी त्योहार साथ मनाते हैं। हम मंदिर-मस्जिद दोनों के पत्थर बनाते हैं।

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कारीगर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि यहां पर लगे सभी कारीगर श्रीराम के काम में लगे हुए हैं। उन्हीं की कृपा से हमें रोजी रोटी मुहैया हो रही है। बताते चलें कि दूरा गांव के पत्थर कारीगरों की हस्तशिल्प पूरे देश में मशहूर है। देशभर में मंदिरो में होने वाले काम के लिए यहां से कारीगर जाते रहते हैं। यहां वर्ष 1993-1995 के बीच बने हाथियों को लखनऊ भेजा गया था।

वहीं खेरागढ़ के नगला कमाल कारीगर महावीर ने बताया कि दो वर्ष से पत्थरों को तराश रहे हैं। प्रभु श्रीराम के मंदिर में उनकी कला दिखेगी, यह उनके लिए खुशी और गौरव की बात है। इस वर्कशॉप में 25 कारीगर काम कर रहे हैं। यह उदगिर, सोनचीत, अयेला, नगला कमाल के हैं। 
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मंदिर के 22 जनवरी को उद्घाटन होने की तारीख तय होने पर काम तेज हो गया है। मिस्त्री धर्म सिंह के मुताबिक रामकाज का कार्य करके उनका जीवन धन्य हो गया है। रोजगार तो बहुत मिलता है लेकिन इस कार्य को करने में अलग ही आनंद है। जो सबका घर बनाते हैं उनके घर को सजाने का मौका मिला है।

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