खराब और घटिया गेहूं लिया। इसे पीसा, काला दिखने पर इसमें सेलखड़ी मिलाई। इससे आटा चमकदार और सफेद हो गया। इसे पैक किया और बिक्री के लिए तैयार। मुनाफाखोर आटे में सेलखड़ी मिलाकर ऐसे ही तीन राज्यों में कालाबाजारी करते थे। खाद्य विभाग के छापे में पकड़े गए इस खेल में पूछताछ में ये सामने आया है।
सहायक आयुक्त खाद्य महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि फतेहपुर सीकरी में समृद्धि ऑयल मिल में छापा मारकर सेलखड़ी मिला 1,350 किलो आटा और 1,800 किलो सेलखड़ी पकड़ी। सेलखड़ी के बोरियों पर उदयपुर मिनरल डेवलपमेंट सिंडिकेट प्राइवेट लिमिटेड लिखा मिला। संबंधित जिले के खाद्य विभाग के जरिये इस कंपनी को भी नोटिस देकर सेलखड़ी की बिक्री का रिकॉर्ड तलब किया जा रहा है। पूछा जा रहा है कि समृद्धि ऑयल को कब से बिक्री कर रहे हो। इसके अलावा आगरा में और कौन-कौन को बिक्री की जाती है।
साथ ही पूछताछ में ये सामने आया है कि आगरा के आसपास के जिलों के अलावा सीमा से जुड़े राजस्थान, मध्यप्रदेश के भी कई जिलों में इसको खपाया जा रहा है। 100 किलो आटे में 8-10 किलो सेलखड़ी मिलाने की आशंका है। इससे वजन भी बढ़ जाता है। औसतन 15 रुपये किलो में सेलखड़ी आती है और आटा 30 रुपये किलो से अधिक में बिक रहा है।
दूध, बेसन-बूंदी का लड्डू समेत 10 नमूने भरे
खाद्य विभाग की टीम ने गैलाना रोड स्थित राधिका स्वीट सेंटर से बेसन के लड्डू, भदावर स्वीट्स से बूंदी के लड्डू, अछनेरा की गोपाल स्वीट्स हाउस से बर्फी-घी के नमूने भरे। टेढ़ी बगिया स्थित बीकानेर स्वीट्स से बेसन के लड्डू, छावड़ा बैकर्स से बिस्किट, जीरा, बेकरी शॉर्टनिंग, केक का नमूना लेकर जांच को भेजा है। बोदला स्थित हाकिम डेयरी से दूध और दही का नमूना लेकर भी जांच कराई जा रही है।
क्यों मिलाते हैं सेलखड़ी
सहायक आयुक्त खाद्य ने बताया कि मिल संचालक सेलखड़ी के उपयोग की सही जानकारी नहीं देते। कभी ये कीड़ों से अनाज को बचाने तो कभी प्लास्टिक की बोरियों को चिकना करने (आटा बाहर निकलने से रोकने) के लिए इसके उपयोग की बात बताते हैं। हालांकि मजदूरों से सख्ती से पूछने पर पता चला कि ये लोग घटिया और खराब गेहूं पीसकर आटा बनाते हैं। इससे आटे में हल्का कालापन आ जाता है। उसे सफेद और चमकदार बनाने के लिए सेलखड़ी का उपयोग करते हैं।
यहां करें शिकायत
टोल फ्री नंबर 18001805533, कार्यालय 0562-2970049 (सुबह 10 से शाम 5 बजे तक)
ऐसे करें पहचान
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि एक कटोरी में आटा लें और उसमें नींबू की कुछ बूंदें डाल दें। बुलबुले उठने लगें तो मिलावट है। ऐसे ही गिलास में पानी भरें और आटा डालकर चम्मच से मिलाएं। आटा तली में बैठ जाए तो मिलावटी है। तीसरा तरीका यह है कि हथेली पर आटा रखकर रगड़ें। शुद्ध आटा खुरदरा लगेगा, असामान्य चिकनाहट हो तो मिलावट हो सकती है।
पथरी और आंतों में रुकावट का खतरा
सीएमओ आगरा डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि लंबे समय तक सेलखड़ी शरीर में पहुंचने से पेट के विकार तेजी से बढ़ते हैं। पेट में दर्द, अपच और आंतों में रुकावट का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में कैल्शियम या सिलिकेट के बारीक कण जमा होकर गुर्दे में पथरी की वजह बन सकते हैं। दांतों की ऊपरी परत घिसने के साथ मसूढ़ों में जख्म भी बन सकते हैं। सीने में सेलखड़ी जमने से टीबी के संक्रमण का खतरा भी रहता है।