उटंगन नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर ट्यूब के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है।
पिनाहट में एक तरफ प्रसव पीड़ा से तड़पती प्रसूता, दूसरी तरफ उफान मारती उटंगन नदी का खौफ। पिनाहट के सुखलालपुरा गांव में पुल न होने का दर्द फिर एक मां को झेलना पड़ा। बुधवार रात जब प्रसव पीड़ा बढ़ी तो नदी होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में परिजन ने खाट को एक बड़ी ट्यूब पर रखा और नदी के बीच होकर प्रसूता को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में किलकारी तो गूंजी लेकिन नवजात को गोद में लिए मां को फिर उसी रास्ते घर लौटना पड़ा। इसका एक वीडियो बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार जंगल के बीच बसे सुखलालपुरा गांव की आबादी करीब एक हजार है। गांव से बाहर निकलने के लिए पक्का मार्ग नहीं है। गांव के किनारे बह रही उटंगन नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर ट्यूब के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है।
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बुधवार रात करीब दो बजे रग्गी कुमार की पत्नी केशवती को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन ट्यूब के ऊपर खाट रखकर प्रसूता को नदी पार कराकर फतेहाबाद अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में महिला ने बेटे को जन्म दिया। बृहस्पतिवार सुबह भी महिला को इसी तरह नदी पार कराकर घर लाया गया। प्रसूता को ट्यूब के सहारे नदी पार कराने का वीडियो बनाकर किसी ने गांव की समस्या को सोशल मीडिया पर साझा किया।
ग्रामीणों ने बताया कि नदी पार करते समय कई हादसे भी हो चुके हैं। गांव के महेंद्र वर्मा, कालीचरण, प्रेम सिंह, बहोरन सिंह, भगवती प्रसाद, रामप्रसाद, देवेंद्र, रेशमा देवी, रेशी देवी, वेणी, गुड़िया, गीता, प्रेमा देवी और सावित्री आदि ने बताया कि अधिकारी से लेकर नेताओं तक पुल निर्माण की मांग की जा चुकी है लेकिन किसी ने गांववालों की पीड़ा नहीं समझी।
तीन माह पूर्व पुल के लिए दिया था धरना
ग्रामीणों ने बताया कि तीन माह पूर्व उन्होंने अपनी समस्याओं को दूर कराने के लिए उटंगन नदी के किनारे धरना भी दिया था। नदी पर पुल निर्माण, रेलवे अंडरपास और गांव तक पक्का रास्ता बनवाने की मांग की थी लेकिन आश्वासन ही मिला।