परिजनों ने बताया कि मुकेश की नशे की लत छुड़ाने के लिए उन्होंने गूगल पर खोज की थी। तभी कालिंदी विहार स्थित संघर्ष नशा मुक्ति केंद्र का नंबर मिला। दो महीने में नशे की लत छुड़ाने का दावा किया गया। इस पर वो मुकेश को भेजने के लिए तैयार हो गए। बुधवार को केंद्र के रजत और दो कर्मचारी कार लेकर घर पहुंचे। मुकेश को अपने साथ ले आए। इसके लिए रुपये भी लिए। बृहस्पतिवार सुबह तकरीबन नौ बजे कर्मचारी ने मुकेश की एक वीडियो उनके भांजे को भेजी। इसमें सभी लोग योग करते नजर आ रहे थे। इसके बाद कोई बात नहीं हुई। शाम तकरीबन 4:35 बजे केंद्र के कर्मचारियों ने फोन किया। बताया कि मुकेश हॉस्पिटल में भर्ती हैं, जल्दी आ जाओ। वह हॉस्पिटल पहुंचे, लेकिन मुकेश मृत थे।
नशा मुक्ति केंद्र के कर्मचारी हंगामे के बाद छत से होकर भाग गए थे। इसमें मरीज ही बचे थे। लोगों के हंगामे की वजह से अंदर से गेट बंद कर दिया गया था। इससे मरीज परेशान हुए। उन्हें दोपहर तक खाना नहीं मिल सका। पता चलने पर पुलिस ने सभी मरीजों के लिए खाना भिजवाया।
परिजनों का कहना था कि संचालक ने रात में ही केंद्र का बोर्ड हटा दिया, जिससे पहचान नहीं हो सके। वहीं कर्मचारी भी सामने नहीं आ रहे हैं।
नशा मुक्ति केंद्र की होगी जांच
सीओ छत्ता सुकन्या शर्मा ने बताया कि परिजनों की मांग थी कि पोस्टमार्टम डॉक्टर के पैनल से हो। पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। वीडियोग्राफी भी हुई है। रिपोर्ट का इंतजार है। परिजनों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। नश मुक्ति केंद्र कब से चल रहा है? कितने मरीज भर्ती हैं? इसकी जांच की जाएगी। पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज संचालक से मांगे गए हैं।
चार बच्चों से उठा पिता का साया
मुकेश इंजन कारीगर थे। उनकी पत्नी मीना हैं। चार बच्चे सोनिया, खुशी, शगुन और अभिषेक हैं। पिता का साया उठ जाने से सभी बेहाल हैं।