शराब, गांजा, नकली घी-खाद, इनामी अपराधियों की धरपकड़ करने वाली एसटीएफ फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध पिस्टल गिरोह की धरपकड़ में नाकाम साबित हो रही है। कछुआ गति से चल रही कार्रवाई की वजह से आरोपियों को बचने का माैका मिल रहा है। आरोपियों को अब तक पकड़ा नहीं जा सका है।
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इस मामले में 24 मई को थाना नाई की मंडी में केस दर्ज हुआ था। इसमें कलेक्ट्रेट के असलहा बाबू संजय कपूर, मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी, प्रापर्टी डीलर भूपेंद्र सारस्वत, शिव कुमार सारस्वत, राजेश बघेल, मोहम्मद जैद और अरशद खान आरोपी बनाए गए थे। कुछ आरोपियों के संबंध मुख्तार अंसारी से भी होने की बात एसटीएफ के सामने आई थी। इस पर जांच चल रही है।
इसी गिरोह ने भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम भदाैरिया को भी पिस्टल बेची थी। इसके भी अवैध होने का शक है। इस पर उन्होंने केस दर्ज कराया था। एक और केस सिकंदरा थाना में भी दर्ज हुआ था। इसमें शिकायतकर्ता विशाल भारद्वाज को धमकाने का आरोप लगाया गया है।
तीन केस दर्ज होने के बाद भी एसटीएफ की विवेचना 16 दिन में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। कभी पत्रावलियां नहीं मिलने की बात कही जाती है तो कभी आरोपियों को बयान के लिए बुलाने का दावा किया जाता है। मगर, इतने दिन बाद कार्रवाई न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
हथियार जब्त नहीं, कैसे होगी कार्रवाई
एसटीएफ ने अब तक एक भी आरोपी के हथियार जब्त नहीं किए हैं, जबकि इस मामले में शिकायत मिलने पर 9 महीने तक जांच की गई थी। असलहा बाबू के कार्यालय से भी दस्तावेज लिए गए थे। मामले में अधिकारी भी निगरानी कर रहे थे। पहले लग रहा था कि आरोपियों की बड़े लोगों से पहुंच के कारण केस दर्ज नहीं होगा। मगर, इस बार केस तो दर्ज हो गया लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। जिन लोगों पर अवैध शस्त्र रखने का आरोप है, उनकी गिरफ्तारी तो दूर हथियार तक जब्त नहीं हो सके हैं।
पीड़ित को जिला पुलिस पर नहीं भरोसा
शिकायतकर्ता विशाल भारद्वाज ने बताया कि जिला पुलिस पर भरोसा नहीं है। उनकी शिकायत पर पूर्व में केस दर्ज नहीं किए थे। उन्हें उच्चाधिकारियों के चक्कर काटने पड़े थे। अब जब केस दर्ज हो गया तो भी पुलिस एक आरोपी से दोस्ती निभा रही है। उसके संबंध ऐसे हैं कि उसकी शिकायत पर भी सुनवाई हो रही है।