पर्यावरण पर प्लास्टिक के दुष्परिणाम को देखते हुए सेंट जोंस कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग की दो शोधार्थियों ने आलू के छिलके और गेहूं की डंठल से बायोप्लास्टिक तैयार की है। यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएगी। यह इस्तेमाल करने के बाद दो माह में खुद नष्ट हो जाएगी।
शोधार्थी हुमरा इकबाल और पूजा शर्मा शोध निर्देशक प्रो. मंजुला आर थॉमस के निर्देशन में तीन वर्ष से बायोप्लास्टिक पर काम कर रहीं हैं। हुमरा ने बताया कि उन्होंने दो तरह की बायोप्लास्टिक तैयार की है। पहली आलू के छिलके से और दूसरी गेहूं के डंठल से। दोनों ही अपशिष्ट पदार्थ (वेस्ट मैटेरियल) हैं।