मैनपुरी। श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी के आयोजन को लेकर रविवार को हुई बैठक में जमकर हंगामा हुआ। डीएम के पहुंचने से पहले ही नगर पालिका चेयरमैन व पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा एक दर्जन से अधिक लोगों के साथ पंडाल छोड़कर चले गए। बाद में डीएम के पहुंचने पर उन्हें वापस बुलाया गया। बैठक में संयोजक चुनने को लेकर विवाद होता रहा।
16 मार्च से आयोजित होने वाले इस प्रदर्शनी के आयोजन को लेकर नुमाइश पंडाल में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी इसमें जमकर विवाद हुआ। सबसे पहले यहां सदर विधायक राजकुमार यादव के अलावा एडीएम, सीडीओ, एएसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इसी दौरान मेले में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के संयोजकों को लेकर हंगामा शुरू हो गया। विवाद पर नगर पालिकाध्यक्ष मनोरमा देवी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष आलोक गुप्ता, घनश्यामदास गुप्ता, डॉ. राकेश गुप्ता, लक्ष्मण गुप्ता, अरविंद गुप्ता, अनिल गुप्ता समेत कई वरिष्ठ जन पंडाल छोड़कर चले गए।
एएसपी ओमप्रकाश सिंह और सीओ सिटी लगातार उन्हें समझाने का प्रयास करते रहे। सूचना पर पहुंचे डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने किसी तरह बैठक शुरू कराई। इसके बाद भी संयोजकों के चुनाव को लेकर भी बैठक में हंगामा होता रहा। बैठक में कई बार एक ही संयोजक के लिए समर्थकों से हाथ उठवाए गए। इस दौरान आरोप प्रत्यारोप हुए। वहीं हर साल आयोजित होने वाले शतरंज कार्यक्रम को निरस्त किए जाने से लोग नाराज थे।
कवि सम्मेलन और देवी जागरण के आयोजन का संयोजक बनाने के लिए डीएम ने मतदान कराया। देवी जागरण के लिए किशन दुबे और नगर पालिका चेयरमैन के बीच मतदान हुआ है। इसमें किशन दुबे ने दो दर्जन अधिक वोट लेकर संयोजकत्व प्राप्त किया। इसी तरह कवि सम्मेलन में सदर विधायक राजकुमार यादव और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के बीच वोटिंग हुई। इसमें सदर विधायक अधिक वोट पाकर संयोजक बने। बाद में पूर्व जिलाध्यक्ष की नाराजगी पर उन्हें डीएम ने सह संयोजक नामित किया।
कई बार बैठक में हंगामे को पहले तो डीएम शांत कराते रहे। लेकिन इसके बाद भी लगातार जब बात नहीं बनी तो वे भी बैठक के बीच में माइक को टेबल पर पटककर चले गए। दरअसल प्रदर्शनी के आयोजन पर होने वाले खर्च पर चर्चा के दौरान लगातार असहमति बनी हुई थी। इससे नाराज डीएम ने बीच में ही बैठक छोड़ दी और चले गए।
डीएम ने नकद चंदा लेने के लिए साफ मना कर दी। उन्होंने कहा कि कोई भी चंदा सीधे समिति के खाते में ही जाएगा। इसके बाद ही कमेटी द्वारा भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी सदस्य नकद चंदा लेता है तो उसकी सदस्यता समाप्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।