ताजनगरी को साफ और स्वच्छ रखने के लिए 30 लाख रुपये प्रतिदिन खर्च हो रहा है। यह एक माह में नौ करोड़ रुपये से अधिक होता है। बावजूद इसके हम सफाई में पिछड़ रहे हैं। जगह जगह कूड़े के ढेर लगे देखे जा सकते हैं। आलम यह है कि हम सफाई के मामले में देश में 85वें स्थान पर है।
आगरा से हर रोज 712 टन से अधिक कूड़ा निकल रहा है। यह कुबेरपुर पर 72 एकड़ क्षेत्र में डाला जा रहा है। इस कूड़े को उठाने के लिए शहर में 110 डलावघर हैं। गली-मोहल्लों से कूड़ा यहां पर डाला जाता है। इस कूड़े को शहर से कुबेरपुर तक पहुंचाने में हर माह करीब 70 लाख रुपये का तेल खर्च किया जाता है।
इसके अलावा चार हजार से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन के नाम पर साढ़े छह करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पांच निजी कंपनियों को दी जाने वाली धनराशि और अन्य खर्चों को जोड़कर एक माह में नौ करोड़ रुपये से अधिक शहर की सफाई पर खर्च किए जाते हैं। लेकिन नतीजा सिफर ही दिखता है।
पांच कंपनियों पर घरों से कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी
शहर से गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग उठाया जा सके, इसके लिए पांच निजी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनको शहर के सभी 100 वार्डों से कूड़ा एकत्रित करना होता है। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। नगर निगम इन निजी कंपनियों को करीब दो करोड़ रुपये प्रति माह भुगतान कर रहा है।
4,290 कर्मचारी सफाई में जुटे
नगर निगम में करीब 4,290 सफाई कर्मचारियों पर सफाई कार्य की जिम्मेदारी है। इनमें से 2,200 कर्मचारी आउटसोर्स से लगे हुए हैं।, 1500 नियमित और 590 संविदा सफाई कर्मचारी हैं।
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने बताया कि नगर निगम शहर की सफाई में करीब नौ करोड़ रुपये प्रति माह खर्च कर रहा है। इसमें कर्मचारी, अधिकारियों का वेतन, वाहनों में तेल और निजी कंपनी, सभी का खर्च शामिल है।