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UP: सैन्य सप्लाई की जीवन रक्षक दवाओं की बाजार में तस्करी... कठघरे में पुलिस; मुख्य आरोपी को मिली जमानत

Sat, 16 Mar 2024 07:23 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा

सार

सैन्य सप्लाई की जीवन रक्षक दवाओं की बाजार में तस्करी के आरोपियों की गिरफ्तारी कर पीठ थपथपाने वाली पुलिस की लापरवाही उजागर हो गई। इसका लाभ मास्टरमाइंड बताए गए महेंद्र उदवानी को मिल गया।

 
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court new - फोटो : istock
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विस्तार
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आगरा में सैन्य सप्लाई की जीवन रक्षक दवाओं की बाजार में बिक्री के मामले में पुलिस की कहानी कोर्ट में फेल साबित हुई। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी और कार बरामदगी तक पर सवाल खड़े हो गए। कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज से पुलिस कठघरे में आ गई। आरोपियों की गिरफ्तारी कर पीठ थपथपाने वाली पुलिस की लापरवाही उजागर हो गई। इसका लाभ मास्टरमाइंड बताए गए महेंद्र उदवानी को मिल गया। कोर्ट ने आरोपी का जमानत प्रार्थनापत्र स्वीकार कर लिया।
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28 फरवरी को हरीपर्वत पुलिस ने मामले का खुलासा किया था। ग्वालियर के कृष्णा अपार्टमेंट निवासी महेंद्र कुमार उदवानी, कोतवाली निवासी फरहान बेग, नाला बुढ़ान सैय्यद निवासी नीरज राजौरा, सीता काॅलोनी निवासी अजय गोयल, बेलनगंज निवासी संस्कार गुप्ता, शेख बुलाखी निवासी प्रवेश राजपूत, नॉर्थ ईदगाह निवासी राजेश भाटिया उर्फ राजा को जेल भेजा था। आरोपियों से 40 लाख की सैन्य सप्लाई की दवाएं, 1 कार, 16300 रुपये, 9 मोबाइल बरामद दिखाए गए थे। बाद में महेंद्र कुमार उदवानी को 3 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया था। पुलिस आरोपी को लेकर जयपुर और ग्वालियर गई थी। मगर, बरामदगी कुछ भी नहीं कर सकी।

चौकी पर दी गईं यातनाएं
महेंद्र कुमार उदवानी के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में प्रार्थनापत्र प्र्रस्तुत किया गया। इसमें पुलिस पर कई आरोप लगाए। सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत किए। अधिवक्ता ने कहा कि महेंद्र कुमार निर्दोष है। इस मामले में उसे झूठा फंसाया है। 26 फरवरी को थाना हरीपर्वत के एसआई बृज किशोर, एक अन्य पुलिसकर्मी और दो बिना वर्दी के पुलिसकर्मी रात 8 बजे कंपू काॅलोनी, ग्वालियर में मधुश्री मेडिकल स्टोर पर माधोगंज थाने की पुलिस के साथ कार से आए थे। विनोद कुमार को थाने ले गए। दबाव बनाकर भाई महेंद्र को बुलवाया। बाद में निवास पर गए। महेंद्र की कार की चाबी ली। आशीर्वाद अपार्टमेंट की पार्किंग से कार को उठाया। इसके सीसीटीवी फुटेज हैं। कार को माधोगंज थाने लाए। पुलिस कार सहित महेंद्र को ट्रांसपोर्ट नगर चौकी पर लाए। आरोप लगाया कि चौकी पर यातनाएं दीं। आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिलने पर रिहाई के एवज में रुपयों की मांग की। रकम का इंतजाम नहीं करने पर झूठा फंसा दिया। आरोपी के अधिवक्ता ने जमानत की याचना की। विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने महेंद्र कुमार उदवानी का जमानत प्रार्थनापत्र स्वीकार कर लिया। उन्हें सशर्त जमानत दे दी गई।
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औषधि निरीक्षक नहीं, वादी बने थाना प्रभारी निरीक्षक
बचाव पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि औषधि अधिनियम के मामले में कार्रवाई का अधिकार औषधि निरीक्षक को है। मगर, औषधि निरीक्षक को कोई योगदान पुलिस की कार्रवाई में नहीं है। समस्त कार्रवाई एसएचओ आलोक कुमार सिंह ने की, जबकि यह कार्रवाई औषधि निरीक्षक की ओर से की जानी चाहिए। तर्कों के संबंध में फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए।
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