रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) को स्मार्ट करने की योजना संभागीय परिवहन विभाग की फाइलों में दबकर रह गई। पांच साल पहले शासन से प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन अधिकारियों ने सुध नहीं ली। उसी का नतीजा है कि अब तक कागज वाली आरसी तैयार की जा रही है।
वाहन पुराना होने पर लोगों की आरसी खराब या खोने की शिकायत रहती है। इस वजह से वाहन बेचने या ट्रांसफर कराने के समय दिक्कत होती है। शासन के स्तर से स्मार्ट आरसी बनाए जाने का प्रस्ताव 5 साल पहले तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय में भी भेजा गया।
स्मार्ट आरसी ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड की तरह तैयार होना था। अभी वाहन की आरसी एक कागज पर प्रिंट कर दी जाती है। कागज के नाम पर फर्जीवाड़ा भी किया जाता है। जबकि स्मार्ट आरसी कार्ड होने से फर्जीवाड़े पर अंकुश लगने की संभावना थी। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों ने योजना को आगे बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
कागज खत्म होने पर रुक जाता है काम
संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय में कागज खत्म होने पर आरसी प्रिंट होने का काम भी रुक जाता है। इस वजह से भी लोगों को दिक्कत होती है। आरसी का कागज लखनऊ कार्यालय से भेजा जाता है। कई बार कागज न आने पर नए वाहनों की आरसी तैयार नहीं होती है। जबकि स्मार्ट कार्ड होने से इस समस्या का भी समाधान हो सकता है।
उपकरण न आने से रुका काम
स्मार्ट आरसी के लिए शासन के स्तर से मशीन और अन्य उपकरण भेजे जाने थे। इनके न आने से कार्य आगे नहीं बढ़ सका। इस संबंध में मुख्यालय को अवगत कराया गया है। - एनसी शर्मा, एआरटीओ (प्रशासन)