ताजमहल के शहर का चयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्मार्ट सिटी योजना के तहत हो गया है। डेवलपमेंट, सफाई, ट्रैफिक सहित कई मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं पर शहर में सफाई के नाम पर फिलहाल कुछ नहीं हो रहा। हाल ही में स्वच्छता सर्वे हुआ है। अभी परिणाम भी नहीं आया है और शहर के हालात ये हैं कि सड़कों से गुजरने वालों को मुंह पर कपड़ा रखना पड़ता है।
शहर में प्रतिदिन करीब 750-800 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसे कलेक्ट करने के लिए जगह-जगह कंटेनर रखे हुए हैं। नगर निगम ने सड़कों के किनारे डलाबघर भी बनाए हैं पर अब ये डलाबघर शहर की छवि खराब कर रहे हैं। यहां से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। यह कूड़ा सड़कों पर बिखर रहा है। अमर उजाला की टीम ने शहर में नगर निगम के डलाबघरों का जायजा लिया तो एक भी डलाबघर ऐसा नहीं मिला जो साफ हो या कूड़ा सड़क पर नहीं बिखर रहा हो। कई स्थानों डलाबघर नहीं है लेकिन जनता और नगर निगम के कर्मचारी कूड़ा खपा रहे हैं। उप नगर आयुक्त अनिल कुमार का कहना था कि सफाई सतत प्रक्रिया है। डलाबघरों से कूड़ा प्रतिदिन उठता। नगर निगम के ट्रक कूड़ा उठाकर ले जाते हैं। उसके बाद उतना ही कूड़ा दोबारा आ जाता है। कोशिश होगी टूटे डलाबघरों को दुरुस्त कराया जाए और कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही डाला जाए।