पुलिस हत्या के पीछे दो बिंदुओं पर पड़ताल कर रही है। एक वजह परिवार के लोगों ने बताई है। दूसरी वजह गलत नजर रखने की हो सकती है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। स्लाइड को विधि विज्ञान प्रयोगशाला गया है। हत्यारोपी सुनील के पिता गरीब दास राजमिस्त्री हैं। उनका मोहल्ले में ही मकान था। उनके चार बेटे सुनील, राकेश, मुन्ना और चंद्रभान हैं। कोरोना काल में मकान बिक गया था। इससे सभी भाई अपने परिवार के साथ अलग रहने लगे।
सुनील जूता फैक्टरी में काम करता था। वह मां और पिता के साथ दूसरी गली में किराए पर रहने लगा। मृतका के पिता ने बताया कि उनका घर के सामने ही एक मकान है। इसके भूतल पर गोदाम है। पहली मंजिल पर एक कमरा है। गरीब दास को किराए पर रख लिया था। सुनील शराब पीने का आदी था। इस कारण उसे घर में लाने के लिए मना कर दिया था। इसके बावजूद 6 महीने से वह पिता के साथ ही रह रहा था। दो महीने से गरीबदास ने किराया नहीं दिया था। पूछने पर उन्होंने कहा था कि सुनील पैसा नहीं दे रहा है।
इस पर गरीबदास घर छोड़कर अपने बड़े बेटे चंद्रभान के घर नगला पदमा में रहने लगे। 15 दिन पहले उन्होंने सुनील से किराया मांगा। सुनील के मना करने पर विवाद हो गया। इस दाैरान परिवार के लोगों ने सुनील को थप्पड़ जड़ दिए और उसे घर में जाने से रोक दिया था। उसने धमकी दी थी कि वह देख लेगा। इसका बदला लेगा।
उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि सच में ऐसा कुछ कर देगा। एक सप्ताह पहले आरोपी के मां और पिता भी आए थे। रविवार को फिर से चले गए थे। परिजनों का आरोप है कि थप्पड़ का बदला लेने के लिए उसने बेटी के साथ हैवानियत की। ड्रम से जब बेटी के शव को निकाला गया तो उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। कपड़े भी अस्त-व्यस्त थे।