डा. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के जाली मार्कशीट प्रकरण में यूनिवर्सिटी अधिकारियों और लिपिकों के बाद अब 84 कॉलेजों पर शिकंजा कसने की तैयारी की गई है। एसआईटी ने इन सभी कॉलेजों के संचालकों को तलब किया है। इनमें से 13 के बयान मंगलवार को दर्ज किए गए।
अभी तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इन कॉलेजों में बीएड कोटे के मुकाबले 43 से लेकर 75 फीसदी अधिक छात्रों को फर्जी मार्कशीट जारी की गई। संचालकों ने मनमानी से मैनेजमेंट कोटा 15 से बढ़ाकर 50 फीसदी तक किया। ऐसे संचालकों को आरोपी बनाया जाएगा।
हाईकोर्ट की निगरानी में एसआईटी लखनऊ 2004 से 2009 तक के बीएड फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच कर रही है। इसमें सात एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। फिलहाल कार्रवाई 2004 के बीएड सत्र में किए गए फर्जीवाड़े में की जा रही है। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि 84 कॉलेजों ने लगभग 25 हजार फर्जी मार्कशीट जारी की थीं।
इन्हें बीएड की जितनी सीट आवंटित की गई थी, उसके मुकाबले 75 फीसदी अधिक तक छात्रों के फार्म भरवाए गए। बाद में इन्हें जाली मार्कशीट जारी कर दी गई। 2004 में यूनिवर्सिटी ने अपने स्तर से मार्कशीट जारी नहीं की थी। इसका कॉलेज संचालकों ने फायदा उठाया।
अब कॉलेज संचालकों से एसआईटी पूछ रही है कि उन्होंने किस आधार पर सीटें बढ़ाई? और बढ़ी हुई सीटों पर मार्कशीट कैसे जारी की गई? इसमें कॉलेज संचालकों के पसीने छूट रहे हैं। एसआईटी इन्हें आरोपी बना सकती है।
लिपिकों के घर की होगी कुर्की
आगरा। इस प्रकरण में यूनिवर्सिटी के छह लिपिक फरार चल रहे हैं। उनके घर पुलिस और एसआईटी दबिश दे चुकी है। अब इनके घर की कुर्की के लिए कोर्ट में अर्जी दी जाएगी। एसआईटी ने इसकी तैयारी कर ली है।
शिक्षकों के बयान दर्ज
आगरा। जाली मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 4300 शिक्षकों में से अभी तक 200 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। कॉलेज संचालकों के बाद शिक्षकों को आरोपी बनाया जाएगा। इनमें से कई की नौकरी पहले ही जा चुकी है।
मैनपुरी के सबसे ज्यादा कॉलेज
आगरा। फर्जी मार्कशीट प्रकरण में फंसे निजी कॉलेजों में सबसे ज्यादा मैनपुरी के बताए गए हैं। इनके अलावा हाथरस, अलीगढ़, एटा, कासगंज, आगरा के भी कॉलेज हैं।