13 साल तक हां, ना के बीच झूलते रहे जेवर एयरपोर्ट को केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की राह में रोड़े आने तय हैं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 200 किमी की दूरी का प्रतिबंध है। ऐसे में आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट को या तो रेड सिग्नल दिखाया जा सकता है या फिर यह तकनीकी कारणों से ताजनगरी से 60 से 100 किमी दूरी के बीच बनाया जाएगा। शहर के पर्यटन उद्योग में यह खबर आते ही चिंता की लकीरें पड़ गईं। उद्यमियों का मानना है कि दोनों ही सूरतों में आगरा के पर्यटन उद्योग के नुकसान की भरपाई नहीं होगी।
आगरा में प्रस्तावित ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट को साल 2003 में तत्कालीन बसपा सरकार ने जेवर में बनाने की पहल की। तमाम विरोध के बाद बीते साल सूबे की सपा सरकार ने जेवर एयरपोर्ट को हरी झंडी दी तो अब केंद्र सरकार से भी क्लीयरेंस मिल गई। जेवर में एयरपोर्ट बनाने का विरोध आगरा के पर्यटन उद्यमी 2003 से ही कर रहे हैं। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चौहान के मुताबिक दिल्ली या जेवर में पर्यटक उतरने के बाद आगरा उसी तरह से आएगा, जैसे अब आ रहा है।
आगरा जिले में एयरपोर्ट बनने पर आइटनरी आगरा से तय होगी। आगरा की पैरोकारी दमदार नहीं रही है। दिल्ली हवाई अड्डे पर ट्रैफिक बढ़ने के बाद मंत्रालय भिवानी में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में जेवर में एयरपोर्ट बनने पर आगरा को सिविल टर्मिनल से ही संतोष करना होगा।
जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से आगरा का दावा तो कमजोर होगा ही, इससे आगरा को फायदा भी नहीं मिलेगा। आगरा की 30 किमी परिधि में एयरपोर्ट बनने से फायदा मिलेगा। फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, एत्मादपुर, खंदौली बेहतर विकल्प हो सकते हैं
शमशुद्दीन
पूर्व अध्यक्ष, एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन
बाह-सैफई की सर्वे रिपोर्ट ठंडे बस्ते में
हिरनगांव में एयरफोर्स की आपत्ति के बाद फरवरी में अखिलेश सरकार ने ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बाह या इटावा के सैफई में बनाने की संभावनाएं तलाशीं। प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को सर्वे के लिए 12 लाख रुपये भी जारी कर दिए, लेकिन तीन महीने बाद भी एयरपोर्ट अथारिटी की कोई कवायद इस सर्वे को लेकर नहीं हुई।
वाराणसी-आगरा-खजुराहो फ्लाइट चल रही फु ल
आगरा। ताजनगरी में एयरपोर्ट की जरूरत न होने और एयर ट्रैफिक न मिलने का दावा करने वालों को एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-406 झटका दे रही है। दिल्ली से वाराणसी, आगरा, खजुराहो की यह फ्लाइट सप्ताह में तीन दिन चलती है और लगभग फु ल चल रही है। अमूमन मार्च में इसे आगरा-खजुराहो के बीच बंद कर दिया जाता था, लेकिन आक्यूपेंसी अच्छी होने से यह पूरे मार्च तो चली ही, अप्रैल में भी इसकी बुकिंग जारी है। एयर इंडिया सूत्रों के मुताबिक वाराणसी से आगरा तक हर दिन 70-80 यात्री और आगरा से खजुराहो 35-45 यात्री इस फ्लाइट को मिल रहे हैं। इसका प्रचार होने और नियमित होने पर इसमें यात्रियाें की संख्या और बढ़ सकती है।
हवाई उड़ान पर जनवरी रहा बेहतर
ताजनगरी में एयर इंडिया की एकमात्र फ्लाइट है। कोहरे में देरी के बाद भी जनवरी में एयर इंडिया को आगरा से ज्यादा यात्री मिले। जनवरी 2015 में जहां आगरा से 1436 यात्री मिले, वहीं इस साल जनवरी में 1723 यात्री खजुराहो के लिए रवाना हुए। इसी तरह जनवरी 2015 में 32 एयरक्राफ्ट के मुकाबले जनवरी 2016 में 42 एयरक्राफ्ट आगरा हवाई अड्डे पर उतरे। आगरा के टूर आपरेटरों के मुताबिक अगर यह उड़ान सप्ताह में सभी दिन मिले और पूरे साल नियमित रहे तो वाराणसी और खजुराहो के लिए हवाई यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होनी तय है। टूरिज्म गिल्ड सचिव राजीव सक्सेना के मुताबिक एयर इंडिया की फ्लाइट कब तक चलेगी, इस पर संशय रहता है। यह शंका खत्म होनी चाहिए।